भाजपा विधायकों ने दिल्ली हाईकोर्ट में सीएजी रिपोर्ट विधानसभा में पेश करने के लिए याचिका दायर की

हाल ही में सात भाजपा विधायकों ने एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें शहर के प्रशासन से संबंधित 14 नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) रिपोर्ट विधानसभा में पेश करने का आग्रह किया गया है। यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ के समक्ष लाया गया।

विधायकों द्वारा दायर यह दूसरी याचिका सीएजी रिपोर्ट के संबंध में पहले की याचिका के अनसुलझे मुद्दों के बाद आई है। याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील ने मामले की तात्कालिकता को स्पष्ट करते हुए इस बात पर जोर दिया कि आगामी चुनावों के कारण विधानसभा सत्र नहीं बुलाया जा सकता है, जिससे इन महत्वपूर्ण रिपोर्टों पर चर्चा में देरी हो सकती है।

तात्कालिकता के बारे में न्यायालय द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में याचिकाकर्ताओं के वकील ने चुनावों के कारण विधानसभा सत्र के किसी भी संभावित स्थगन से पहले इन रिपोर्टों की समीक्षा किए जाने के महत्व पर जोर दिया। इसके बाद न्यायालय ने निर्देश दिया कि मामले को सामान्य तरीके से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

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विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता और भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट, ओम प्रकाश शर्मा, अजय कुमार महावर, अभय वर्मा, अनिल कुमार बाजपेयी और जितेंद्र महाजन लगातार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं कि इन सीएजी रिपोर्टों को जांच के लिए विधानसभा के समक्ष रखा जाए। वकील नीरज और सत्य रंजन स्वैन के माध्यम से दायर की गई नवीनतम याचिका में दावा किया गया है कि पिछले अदालती आदेशों के बावजूद, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष को आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है।

याचिका में 20 दिसंबर, 2024 को एक संचार पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें अध्यक्ष ने सूचित किया कि उन्हें दोपहर 12:51 बजे तक सीएजी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) के वरिष्ठ वकील द्वारा की गई पिछली प्रतिबद्धताओं का स्पष्ट उल्लंघन है।

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