भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद विवाद: वकीलों की हड़ताल के कारण मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई 18 फरवरी तक टली

भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई को 18 फरवरी तक स्थगित कर दिया। राज्यव्यापी वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद पहली बार सूचीबद्ध हुआ था, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे से खोलकर पक्षकारों को उपलब्ध कराने को कहा गया था।

धार स्थित 11वीं सदी के इस संरक्षित स्मारक को लेकर हिंदू पक्ष इसे माता वाग्देवी (सरस्वती) का भोजशाला मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर ASI के संरक्षण में है।

वकीलों की अनुपस्थिति के कारण दोनों पक्षों के वादकारी स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुए।

याचिकाकर्ता संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ से जुड़े अशिष गोयल ने बताया कि वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई टाल दी गई और अगली तारीख 18 फरवरी निर्धारित की गई है।

मुस्लिम पक्ष की ओर से मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी से जुड़े अब्दुल समद उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि विवाद पर अंतिम निष्कर्ष से पहले हाईकोर्ट को जबलपुर प्रधान पीठ में लंबित 2019 की याचिका पर निर्णय करना चाहिए। इस याचिका में 7 अप्रैल 2003 के ASI आदेश के क्रियान्वयन को अनुचित बताया गया है।

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ASI के आदेश के अनुसार विवाद शुरू होने के बाद से मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुसलमानों को नमाज़ की अनुमति दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी को हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को खोला जाए और संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराया जाए। जिन हिस्सों की प्रतिलिपि संभव न हो, उन्हें वकीलों की उपस्थिति में निरीक्षण की अनुमति देने को कहा गया है। साथ ही पक्षकारों को आपत्तियां दाखिल करने की छूट दी गई है, जिसके बाद अंतिम सुनवाई होगी।

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शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि याचिका के अंतिम निस्तारण तक स्थल की यथास्थिति बनाए रखी जाए और ASI के वर्तमान पूजा–नमाज़ संबंधी आदेश का पालन जारी रहे।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 फरवरी को होने की संभावना है।

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