पटना हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक बराबर गुफाओं में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर कड़ा रुख अपनाते हुए जहानाबाद जिला प्रशासन से पिछले पांच वर्षों में श्रावणी मेले से हुई आय और इलाके के स्थायी विकास पर खर्च की गई राशि का पूरा ब्योरा तलब किया है। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन की दिलचस्पी केवल राजस्व वसूलने में दिखती है, जबकि इस ऐतिहासिक धरोहर स्थल पर बुनियादी ढांचा तैयार करने को लेकर उसकी जिम्मेदारी शून्य नजर आती है।
साल भर की स्थायी नागरिक सुविधाओं का मांगा ब्लूप्रिंट
जस्टिस राजीव रॉय की अदालत ने जहानाबाद के जिलाधिकारी को वर्ष 2026-27 तक के पांच वर्षों के राजस्व और विकास खर्च का विस्तृत लेखा-जोखा पेश करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सावन के एक महीने चलने वाले मेले के दौरान की जाने वाली अस्थायी व्यवस्थाओं से प्रशासनिक जिम्मेदारियों की इतिश्री नहीं हो सकती। इसके लिए एक ठोस और स्थायी विकास योजना पेश करनी होगी।
प्रशासन से पूछा गया है कि वह पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए साल भर स्वच्छ पेयजल, पक्के शौचालय, पहाड़ियों के इर्द-गिर्द बैठने के लिए बेंच, पक्के रास्ते, भूमिगत या व्यवस्थित बिजली के तार, कचरा निस्तारण और निर्धारित वेंडिंग जोन स्थापित करने के लिए क्या कदम उठा रहा है। अदालत ने उल्लेख किया कि ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी की ये गुफाएं मौर्य काल में सम्राट अशोक और उनके पौत्र दशरथ ने आजीवक संप्रदाय के संन्यासियों के आवास के तौर पर बनवाई थीं। कठोर ग्रेनाइट पत्थरों को काटकर तराशी गई इन गुफाओं की शीशे जैसी चमक (पॉलिश) दुनिया भर के शोधकर्ताओं को आकर्षित करती है, वहीं सावन के महीने में यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
2024 की भगदड़ के बाद सुरक्षा और स्वास्थ्य ढांचे की समीक्षा
हाईकोर्ट के यह निर्देश 12 अगस्त 2024 की तड़के मेले में मची उस घातक भगदड़ की पृष्ठभूमि में भी आए हैं, जिसमें सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। उस हादसे के बाद प्रशासन ने मेले को बीच में ही रोक दिया था और 14 अगस्त से पूरे मेला क्षेत्र को नो-वेंडिंग जोन घोषित कर सभी अस्थायी दुकानें बंद करा दी थीं।
भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अदालत ने जहानाबाद के पुलिस अधीक्षक को सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और सीसीटीवी कैमरों की स्थायी व्यवस्था पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इसके अलावा, सिविल सर्जन को 2024 के हादसे के बाद की गई चिकित्सा व्यवस्था और गुफाओं के समीप एक स्थायी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की स्थापना पर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।
वन विभाग से पूरे परिसर को हरा-भरा बनाने और जीर्ण-शीर्ण पड़े स्थानीय डाक बंगले के नवीनीकरण की योजना मांगी गई है, जबकि भवन निर्माण विभाग को घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं का खाका पेश करना होगा। वहीं, जहानाबाद के जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक विशेष समिति मौके का मुआयना कर वस्तुस्थिति रिपोर्ट और स्थायी सुविधाओं से जुड़े सुझाव अदालत को सौंपेगी।
टेंडर विवाद में ठेकेदार को मिली राहत
इस पूरे मामले की शुरुआत राजबल्लभ प्रसाद नामक संवेदक की रिट याचिका से हुई थी। उन्होंने वर्ष 2024-25 के बराबर श्रावणी मेले की बंदोबस्ती 1,77,62,159 रुपये की उच्चतम बोली लगाकर हासिल की थी। यह टेंडर 22 जुलाई से 19 अगस्त 2024 तक के लिए था। यद्यपि उन्होंने पूरी राशि 19 अक्टूबर 2024 तक जमा करा दी थी, इसके बावजूद जिलाधिकारी ने 18 फरवरी 2025 को विलंब शुल्क के रूप में 1,37,461 रुपये का जुर्माना लगा दिया था।
जस्टिस रॉय ने जिलाधिकारी के 18 फरवरी 2025 के जुर्माना आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही स्पष्ट किया कि इस याचिका के लंबित रहने के आधार पर राजबल्लभ को प्रशासन द्वारा जारी होने वाले भविष्य के किसी भी टेंडर में भाग लेने से नहीं रोका जाएगा।
हाईकोर्ट ने सभी संबंधित विभागों को विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। आदेश का पालन न करने वाले अधिकारी को पटना हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी में 2,000 रुपये का हर्जाना जमा करना होगा। अदालत ने इस मामले की प्राथमिक अनुपालन रिपोर्ट देखने के लिए 28 सितंबर की तिथि निर्धारित की है, जबकि अगली विस्तृत सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

