इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से उस याचिका पर जवाब तलब किया है, जिसमें एक छात्रा ने राज्य स्तर की पेंटिंग प्रतियोगिता में जीती गई ₹51,000 की नकद राशि न मिलने की शिकायत की है। करीब छह महीने पहले आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा, दीक्षा मिश्रा ने संस्कृति विभाग द्वारा पुरस्कार राशि का भुगतान न किए जाने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
मामला उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 के बीच आयोजित ‘सेवा पखवाड़ा-2025’ कार्यक्रम से जुड़ा है। इस कार्यक्रम के तहत 29 सितंबर 2025 को प्रयागराज में जिला स्तरीय पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई थी।
याचिकाकर्ता दीक्षा मिश्रा ने इस प्रतियोगिता की सीनियर कैटेगरी में भाग लिया था। परिणामों की घोषणा के बाद उन्हें प्रथम स्थान प्राप्तकर्ता घोषित किया गया, जिसके लिए ₹51,000 का नकद पुरस्कार निर्धारित किया गया था। हालांकि, प्रतियोगिता जीतने के कई महीने बीत जाने के बाद भी राज्य प्राधिकारियों ने छात्रा को इनामी राशि का भुगतान नहीं किया।
छात्रा की ओर से पेश वकील ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि राज्य सरकार की यह निष्क्रियता अनुचित है। वकील ने जोर देकर कहा कि यह पुरस्कार सरकारी कार्यक्रम का हिस्सा था और याचिकाकर्ता ने अपनी योग्यता से सीनियर कैटेगरी में शीर्ष स्थान हासिल किया था। याचिका में कहा गया कि लगभग आधा साल बीत जाने के बाद भी धनराशि जारी न होने के कारण छात्रा को कानूनी सहारा लेने पर मजबूर होना पड़ा।
जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रशांत की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुरस्कार राशि का भुगतान न किए जाने पर छात्रा की शिकायत को गंभीरता से लिया।
9 अप्रैल के अपने आदेश में, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को संबंधित अधिकारियों से निर्देश (जवाब) प्राप्त करने और अगली सुनवाई पर पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सरकार को भुगतान में देरी का कारण स्पष्ट करने के लिए समय दिया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2026 को तय की गई है, तब तक सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।

