ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को नाम व लिंग परिवर्तन का अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को दिए नए प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के नाम और लिंग परिवर्तन के अधिकार को मान्यता देते हुए उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा परिषद को निर्देश दिया है कि वे लिंग परिवर्तन सर्जरी के बाद आवेदक को नए प्रमाणपत्र और अंकपत्र जारी करें।

न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने माध्यमिक शिक्षा परिषद, बरेली के क्षेत्रीय सचिव द्वारा 8 अप्रैल 2025 को पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आवेदक की नाम और लिंग परिवर्तन की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि “बहुत विलंब से सुधार का कोई प्रावधान नहीं है” और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 तथा नियम, 2020 इस पर लागू नहीं होते।

याचिकाकर्ता शरद रोशन सिंह ने महिला से पुरुष के रूप में लिंग परिवर्तन सर्जरी कराई थी। इसके बाद उन्हें ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्ति के रूप में मान्यता दी गई और जिला मजिस्ट्रेट ने धारा 6 के अंतर्गत पहचान प्रमाणपत्र जारी किया।

इसके बाद उन्होंने नियम 5(3) के तहत अपने शैक्षणिक अभिलेखों में नाम और लिंग परिवर्तन के लिए आवेदन किया, जिसे शिक्षा बोर्ड ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि इस तरह के सुधार के लिए कोई प्रक्रिया नहीं है और आवेदन देर से किया गया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एच.आर. मिश्रा और चित्रांगदा नारायण ने याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि लिंग परिवर्तन के बाद नाम और लिंग संशोधन का अधिकार ट्रांसजेंडर अधिनियम 2019 के तहत संरक्षित है। शिक्षा बोर्ड द्वारा आवेदन अस्वीकार करना न केवल कानून के विपरीत है, बल्कि यह व्यक्ति की गरिमा और पहचान के अधिकार का भी उल्लंघन है।

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उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और अन्य उच्च न्यायालयों के कई निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के आत्म-पहचान और दस्तावेजों में सुधार के अधिकार को मान्यता दी गई है।

न्यायमूर्ति शमशेरी ने कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 एक विशेष कानून है, जिसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने धारा 20 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अधिनियम के प्रावधान “किसी अन्य कानून के अलावा हैं और उसके विपरीत नहीं।”

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उन्होंने कहा, “राज्य के संबंधित अधिकारियों ने याचिकाकर्ता के पक्ष में अधिनियम, 2019 के प्रावधान लागू न करके कानूनी त्रुटि की है।”

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद को निर्देश दिया कि वह ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 तथा नियम, 2020 के अनुरूप याचिकाकर्ता का नाम और लिंग सुधार कर नया अंकपत्र और प्रमाणपत्र जारी करे।

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