हनीट्रैप गिरोहों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, मेरठ आईजी को दिए जांच के निर्देश; कहा- सभ्य समाज के लिए बड़ा खतरा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को उन संगठित गिरोहों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जो महिलाओं का उपयोग कर पुरुषों को ‘हनीट्रैप’ में फंसाते हैं और उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। इस स्थिति को समाज के लिए “अत्यंत हानिकारक” (very pernicious) बताते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसे अपराधों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो एक सभ्य समाज में रहना कठिन हो जाएगा। कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज रंगदारी के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया और इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए पूरे जोन में जांच के आदेश दिए।

यह मामला बिजनौर जिले की फौजिया और अन्य द्वारा दायर एक रिट याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं ने अपने खिलाफ दर्ज रंगदारी (extortion) के एक मामले में एफआईआर (FIR) को रद्द करने की मांग की थी।

पुलिस द्वारा प्रस्तुत मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे बिजनौर के एक होटल में बुलाया गया, जहां एक महिला के साथ उसके निजी पलों का वीडियो बना लिया गया। इसके बाद, आरोपियों ने उस वीडियो के आधार पर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और मामले को रफा-दफा करने के बदले 8 से 10 लाख रुपये की मांग की। पीड़ित की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने 30 मार्च को दिए अपने आदेश में इन आरोपों की प्रकृति पर गहरी चिंता व्यक्त की। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने बाद में अपनी याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, लेकिन हाईकोर्ट ने माना कि मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए इस पर व्यापक न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा:

READ ALSO  Illegal Release of Noida Gangster: Allahabad High Court Stays Arrest of Suspended Banda Jail Superintendent

“यह एक बहुत ही गंभीर मामला है, इसके लिए मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) द्वारा गहन जांच किए जाने की आवश्यकता है।”

संगठित रंगदारी के सामाजिक प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने आगे कहा:

“यदि इस तरह के अपराधों को जारी रहने की अनुमति दी गई, तो एक सभ्य दुनिया में रहना मुश्किल हो जाएगा।”

जस्टिस मुनीर और जस्टिस सक्सेना ने हनीट्रैप गिरोहों के बढ़ते प्रभाव को “अत्यंत हानिकारक स्थिति” करार दिया। कोर्ट के अनुसार, ये केवल छिटपुट घटनाएं नहीं हैं, बल्कि संगठित अपराध के एक खतरनाक और व्यापक ट्रेंड को दर्शाती हैं।

READ ALSO  गिर सोमनाथ डिमोलिशन  मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देरी की, याचिकाकर्ताओं को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया

एफआईआर रद्द करने की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

  1. जोन-स्तरीय सतर्कता: मेरठ जोन के आईजी (IG) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्त सतर्कता बरतने के लिए अलर्ट करें।
  2. गहन जांच: कोर्ट ने इन जबरन वसूली करने वालों के काम करने के तरीकों और उनके नेटवर्क की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं।
  3. उच्च स्तरीय सूचना: हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि इस आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP), मेरठ जोन के आईजी और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को आवश्यक और त्वरित कार्रवाई के लिए भेजी जाए।
READ ALSO  शिवसेना (यूबीटी) नेता की चुनाव याचिका के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद नारायण राणे को समन जारी किया

हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप वित्तीय शोषण के लिए किए जाने वाले डिजिटल और भौतिक जालसाजी के खिलाफ एक सुव्यवस्थित पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles