ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए अग्निवीर मुरली नाइक की मां ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया; नियमित सैनिकों जैसी शहीद लाभ न मिलने पर भेदभाव का आरोप

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से हुई गोलाबारी में शहीद हुए अग्निवीर मुरली नाइक की मां ज्योतिबाई नाइक ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अग्निपथ योजना के कारण उनके परिवार को नियमित सैनिकों के परिवारों की तरह पूर्ण शहीद लाभ नहीं दिए जा रहे हैं, जो उनके साथ भेदभाव है।

यह याचिका अधिवक्ताओं संदीश मोरे, हेमंत घडिगांवकर और हितेन्द्र गांधी के माध्यम से दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि अग्निवीर नियमित सैनिकों की तरह ही सीमाई जोखिम उठाते हैं, वही कर्तव्य निभाते हैं और वही बलिदान देते हैं, फिर भी शहादत के बाद उनके परिवारों को दीर्घकालिक पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता।

मुरली नाइक को जून 2023 में भारतीय सेना में भर्ती किया गया था। 9 मई को वे पुंछ में शहीद हुए, जब पाकिस्तान सेना ने भारी तोपखाने और मोर्टार से फायरिंग करके युद्धविराम का उल्लंघन किया था। यह घटना पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने के दौरान हुई थी।

याचिका में कहा गया है कि अग्निपथ योजना “स्पष्ट रूप से अग्निवीरों को सेवा पश्चात पेंशन लाभ और वे सभी दीर्घकालिक कल्याणकारी अधिकारों से बाहर रखती है, जो सामान्यतः नियमित सैनिकों को मिलते हैं।” मारे गए अग्निवीर के परिवार को लगभग ₹1 करोड़ का अनुग्रह अनुदान तो मिलता है, लेकिन नियमित पारिवारिक पेंशन और अन्य संस्थागत लाभ नहीं दिए जाते।

ज्योतिबाई ने अपने बेटे की शहादत के बाद कई अधिकारियों को पत्र लिखकर नियमित सैनिकों के समान लाभ देने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला। याचिका के अनुसार, यह योजना अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच “मनमाना और अनुचित वर्गीकरण” करती है, जिसका कोई तार्किक आधार नहीं है और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि अग्निपथ योजना की सम्पूर्ण वैधता को चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि केवल उस भेदभावपूर्ण हिस्से को, जिसमें अग्निवीरों के परिवारों को पूर्ण शहीद लाभ से वंचित रखा गया है। याचिका में अदालत से समान पेंशन, कल्याणकारी उपाय और शहीद के रूप में संस्थागत मान्यता सुनिश्चित करने का निर्देश मांगा गया है, साथ ही इन लाभों को नाइक के परिवार तक पहुँचाने पर विचार करने की मांग भी की गई है।

यह मामला आगामी दिनों में हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की संभावना है।

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