कोडीन कफ सिरप मामले में एफआईआर रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक की मांग वाली याचिकाएँ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कोडीन-आधारित कफ सिरप के अवैध भंडारण और वितरण से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर को चुनौती देने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने पारित किया।

ये रिट याचिकाएँ वीरेंद्र लाल वर्मा और अन्य द्वारा दायर की गई थीं, जिनमें वाराणसी सहित राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने जांच के दौरान गिरफ्तारी से संरक्षण देने की भी प्रार्थना की थी।

ये एफआईआर उत्तर प्रदेश में अत्यधिक नियंत्रित कोडीन-युक्त कफ सिरप के कथित अवैध भंडारण, आपूर्ति और बिक्री से जुड़े व्यापक मामले का हिस्सा हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। एसआईटी का नेतृत्व आईजी रैंक के एक अधिकारी द्वारा किया जा रहा है और इसमें खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्राधिकरण (FDSA) के अधिकारी भी शामिल हैं।

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एसआईटी को वित्तीय लेन-देन की जांच, दवाओं के वैध आपूर्ति तंत्र से विचलन का पता लगाने और आरोपियों से जुड़े सभी सुरागों को जोड़ने का दायित्व सौंपा गया है।

राज्य सरकार के अनुसार, जांच में कथित तौर पर अवैध कोडीन सिरप के कारोबार में शामिल बड़े “सुपर-स्टॉकिस्टों” का एक नेटवर्क सामने आया है। पांच प्रमुख सुपर-स्टॉकिस्टों में से तीन — वाराणसी के भोला जायसवाल, सहारनपुर के विभोर राणा और गाजियाबाद के सौरभ त्यागी — को गिरफ्तार किया जा चुका है। शेष दो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।

अब तक लगभग 3.5 लाख कफ सिरप की बोतलें, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 4.5 करोड़ रुपये है, जब्त की जा चुकी हैं। अवैध कारोबार से जुड़े कुल 32 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि कफ सिरप की खेप भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा के पार तस्करी की जा रही थी। नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन और धन के स्रोतों की जांच की जा रही है। इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी समानांतर जांच कर रहा है।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में कोडीन-युक्त सिरप के सेवन से किसी भी प्रकार की मृत्यु की सूचना नहीं है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने पहले कहा था कि जांच में अत्यधिक नियंत्रित दवाओं के संगठित और बड़े पैमाने पर अवैध डायवर्जन का खुलासा हुआ है।

हाईकोर्ट द्वारा इस स्तर पर हस्तक्षेप से इनकार किए जाने के बाद, कोडीन कफ सिरप रैकेट की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा आगे भी जारी रहेगी।

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