आयोध्या मस्जिद की जमीन पर दावा ठोकने वाली दो बहनों की याचिका को हाई कोर्ट ने किया खारिज

अयोध्या के धन्नीपुर में मस्जिद निर्माण के लिए दी गई भूमि पर अपना दावा करने वाली दिल्ली की दो बहनों की याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने खारिज करते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया है। 

पूर्व में कोर्ट में जमीन के आवंटन को चुनौती देते हुए मालिकाना हक का दावा किया गया था। इस दावे पर फैजाबाद जिला प्रशासन ने कोर्ट के समक्ष  अपना जवाब देते हुए कहा कि बहनों ने जिस जमीन पर अपना दावा किया है। वह धन्नीपुर नही बल्कि जिले के   शेरपुर जाफर गांव की हैं। 

दिल्ली की निवासी हैं दोनों बहनें-

जिन दो बहनों ने मस्जिद की जमीन पर अपना मालिकाना हक के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है। उनमे से बड़ी बहन दिल्ली की मॉडल टाउन इलाके में रहती हैं जबकि छोटी बहन शालीमार बाग स्थित एनडीपीएल कॉलोनी में रहती हैं। 

पाकिस्तान से भारत आया था परिवार

मस्जिद की जमीन पर दावा ठोकने वाली बहनों ने बताया कि  हिंदुस्तान बंटवारे के वक्त उनके माता पिता पाकिस्तान के पंजाब से आए थे। वह फैजाबाद जिले मतलब की अयोध्या में ही बस गए। उनके पिता ज्ञान चंद्र पंजाबी को 1560 रुपये में 5 वर्ष के लिए धन्नीपुर ग्राम में करीब 28 एकड़ भूमि का पट्टा दिया गया। याचियों के पिता का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। लेकिन वर्ष 1998 में सोहावल एसडीएम ने उनके पिता का नाम रिकॉर्ड से हटा दिया था। 

प्रशासन ने दावा को गलत बताया-

अयोध्या के जिला प्रशासन ने दोनों बहनों के दावों को गलत बताते हुए कोर्ट में सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही थी। चकबंदी विभाग के बंदोबस्त अधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बहनों के दावे के बाद सबूत पेश कर बयान जारी किया था। उनका कहना था कि जिस जमीन पर दोनों बहनें अपना दावा कर रही है।वह धन्नीपुर न होकर  शेरपुर जाफर गांव की हैं।

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