स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो केस के शिकायतकर्ता की हिस्ट्रीशीट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश आशुतोष महाराज द्वारा दायर एक रिट याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने पुलिस द्वारा अपनी हिस्ट्रीशीट खोले जाने की कार्रवाई को चुनौती दी है। आशुतोष महाराज वही व्यक्ति हैं जिन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने सरकार को जवाबी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए 13 मई की तारीख तय की है। अगली सुनवाई पर ही याचिकाकर्ता की अंतरिम राहत की मांग पर भी विचार किया जाएगा।

कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आशुतोष महाराज ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ खोली गई हिस्ट्रीशीट और पुलिस निगरानी रजिस्टर में उनका नाम शामिल करना अनुचित है। उन्होंने अपनी याचिका में मांग की है कि उनका नाम इस निगरानी सूची से तुरंत हटाया जाए।

याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि वह मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और शाही ईदगाह-कृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े कई मामलों में पक्षकार भी हैं।

हिस्ट्रीशीट खोले जाने के आधार पर सवाल उठाते हुए याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि:

  • उनके खिलाफ दर्ज किए गए अधिकांश मामलों में उन्हें ट्रायल के बाद बरी किया जा चुका है।
  • कुछ अन्य मामलों में ऊपरी अदालतों द्वारा कार्यवाही पर रोक (स्टे) लगा दी गई है।
  • शेष मामले आपराधिक नहीं, बल्कि दीवानी (सिविल) प्रकृति के हैं, जो मुख्य रूप से धार्मिक संपत्तियों के विवाद से संबंधित हैं।
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आशुतोष महाराज के अनुसार, शामली जिले के कांधला थाने में उनके खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोली गई थी, जिसे उन्होंने कानूनन गलत बताया है।

आशुतोष महाराज उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने 56 वर्षीय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप लगाए थे। फरवरी में, प्रयागराज की एक विशेष अदालत ने उनके आवेदन पर कार्रवाई करते हुए स्वामी और अन्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया था।

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शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रयागराज में माघ मेला 2025-26 के दौरान दो नाबालिगों का यौन शोषण किया गया। आशुतोष महाराज ने दावा किया था कि पीड़ितों ने खुद उन्हें इस घटना के बारे में बताया था, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।

हालांकि, 25 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत दे दी थी। जमानत देते समय कोर्ट ने नाबालिग पीड़ितों के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यह “असामान्य” है कि उन्होंने अपने प्राकृतिक अभिभावकों के बजाय आशुतोष महाराज को आपबीती सुनाई।

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अब कोर्ट इस बात की समीक्षा करेगा कि क्या याचिकाकर्ता का पिछला रिकॉर्ड वास्तव में हिस्ट्रीशीट खोलने के मानदंडों को पूरा करता है या नहीं।

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