अबू सलेम की पैरोल याचिका खारिज, बंबई हाईकोर्ट ने कहा- सुरक्षा खर्च नहीं चुका सकते तो रिहाई नहीं

बंबई हाईकोर्ट ने गुरुवार को 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में दोषी गैंगस्टर अबू सलेम की इमरजेंसी पैरोल याचिका खारिज कर दी। सलेम ने उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव जाकर बड़े भाई अबू हकीम अंसारी के निधन पर शोक प्रकट करने के लिए 14 दिन की पैरोल मांगी थी, लेकिन उसने पुलिस एस्कॉर्ट (सुरक्षा) शुल्क भरने में असमर्थता जताई थी।

मुख्य न्यायाधीश अजय गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चंडक की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यदि सलेम बाहर जाना चाहता है, तो वह राज्य द्वारा तय सुरक्षा शुल्क का भुगतान करने से “मोलभाव नहीं कर सकता।”

सलेम ने अपनी याचिका में कहा था कि उसके बड़े भाई अबू हकीम अंसारी का निधन नवंबर 2025 में हुआ और उसने 15 नवंबर को जेल प्रशासन को इमरजेंसी पैरोल के लिए आवेदन दिया था ताकि वह अंतिम संस्कार और उससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो सके। हालांकि, जेल प्रशासन ने 20 नवंबर को उसकी याचिका खारिज कर दी थी।

सलेम के वकील ने अदालत को बताया कि वह अधिकतम ₹1 लाख तक का ही सुरक्षा शुल्क देने में सक्षम है, जबकि राज्य सरकार ने उससे ज्यादा राशि तय की थी। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि अगर सलेम बाहर जाना चाहता है तो उसे पूरा शुल्क देना होगा—कोई छूट नहीं मिलेगी।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि नवंबर 2005 में गिरफ्तारी के बाद अबू सलेम को केवल दो बार कुछ दिन की पैरोल मिली थी—एक बार उसकी मां की मृत्यु पर और दूसरी बार सौतेली मां की मृत्यु के बाद।

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अबू सलेम को नवंबर 2005 में पुर्तगाल से लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद प्रत्यर्पित किया गया था। मुंबई बम धमाकों में दोषी पाए जाने पर उसे 25 साल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा, 1995 में मुंबई के बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या के मामले में विशेष टाडा अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा भी दी है।

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