दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को अल फलाह यूनिवर्सिटी समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है। दो मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में हिरासत में बंद सिद्दीकी ने अपनी पत्नी के कैंसर के इलाज में सहयोग करने के लिए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत या कस्टडी पैरोल देने की मांग की है।
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने ED को नोटिस जारी करते हुए सिद्दीकी की ओर से पेश मेडिकल दस्तावेजों की जांच करने और 6 नवंबर को अदालत को जानकारी देने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता के वकील द्वारा मामले की तात्कालिकता बताए जाने पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की।
ED ने अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि सिद्दीकी के फरार होने की आशंका है।
पत्नी को चौथे चरण का ओवेरियन कैंसर, 10 नवंबर को कीमोथेरेपी
सिद्दीकी की याचिका के अनुसार, उनकी पत्नी चौथे चरण के ओवेरियन कैंसर से पीड़ित हैं और 10 नवंबर को उनकी कीमोथेरेपी का अगला सत्र निर्धारित है।
उनके वकील ने अदालत को बताया कि पत्नी के आगे के इलाज के संबंध में डॉक्टरों से परामर्श करना आवश्यक है। इसी आधार पर मेडिकल और मानवीय कारणों से सात दिनों की अंतरिम जमानत मांगी गई है।
वकील ने वैकल्पिक रूप से कस्टडी पैरोल देने का अनुरोध किया। कस्टडी पैरोल के तहत किसी कैदी को सशस्त्र पुलिसकर्मियों की निगरानी में निर्धारित स्थान पर जाने की अनुमति दी जाती है।
इससे पहले जुलाई में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, अदालत ने उन्हें तीन निर्धारित तारीखों पर कस्टडी पैरोल के जरिए पत्नी से मिलने की अनुमति दी थी।
415.10 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला
सिद्दीकी को ED ने 18 नवंबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला फरीदाबाद स्थित उनके शैक्षणिक संस्थान में छात्रों से वसूली गई फीस के जरिए कथित रूप से अवैध धन जुटाने से जुड़ा है।
जांच की शुरुआत दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज दो FIR के आधार पर हुई थी। इनमें आरोप लगाया गया था कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) की मान्यता और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से प्राप्त मान्यता के बारे में गलत जानकारी दी।
ED का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये जुटाए और छात्रों से प्राप्त धन का इस्तेमाल निजी उद्देश्यों के लिए किया गया।
इसके बाद ED ने सिद्दीकी को दिल्ली में 45 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन कथित रूप से धोखाधड़ी के जरिए हासिल करने से संबंधित एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी गिरफ्तार किया।
लाल किला धमाके की जांच में भी सामने आया था यूनिवर्सिटी का नाम
अल फलाह यूनिवर्सिटी कथित ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ नेटवर्क की जांच के दौरान भी जांच एजेंसियों के दायरे में आई थी।
इस मामले में यूनिवर्सिटी से जुड़े दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, इसके अस्पताल से जुड़े एक अन्य डॉक्टर उमर-उन-नबी की पहचान 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए आत्मघाती धमाके के हमलावर के रूप में हुई थी। इस धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी।
अब दिल्ली हाईकोर्ट 6 नवंबर को ED का जवाब मिलने के बाद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत या कस्टडी पैरोल की मांग पर सुनवाई करेगा।
