बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई में वर्ष 2011 में हुए कीनन सैंटोस और रूबेन फर्नांडीस हत्याकांड में जितेंद्र राणा की हत्या के अपराध में दोषसिद्धि बरकरार रखी है। हालांकि, कोर्ट ने उसकी उम्र को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की सजा घटाकर बिना किसी छूट के 20 साल की कैद कर दी है। वहीं, दो अन्य आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया है।
न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की खंडपीठ ने गुरुवार को वर्ष 2016 में विशेष अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले के खिलाफ दाखिल अपीलों पर यह निर्णय दिया।
हाईकोर्ट ने सुनील बोथ और दीपक पिवाल के खिलाफ हत्या का आरोप साबित नहीं माना। हालांकि, दोनों को साधारण चोट पहुंचाने के अपराध में दोषी ठहराने और एक साल की कैद की सजा देने का विशेष अदालत का फैसला बरकरार रखा।
यदि दोनों किसी अन्य मामले में हिरासत में रखने के लिए आवश्यक नहीं हैं, तो उनकी जेल से रिहाई हो सकती है।
जितेंद्र राणा की उम्र को देखते हुए सजा में बदलाव
हाईकोर्ट ने जितेंद्र राणा को हत्या का दोषी मानने के विशेष अदालत के फैसले को सही ठहराया, लेकिन उसकी सजा में संशोधन किया।
खंडपीठ ने कहा कि राणा की उम्र को ध्यान में रखते हुए उसकी उम्रकैद की सजा घटाकर 20 साल की जा रही है। हालांकि, इस अवधि में उसे सजा में कोई छूट नहीं मिलेगी।
कोर्ट ने कहा, “उसकी उम्र को ध्यान में रखते हुए हम उम्रकैद की सजा घटाकर 20 साल की कैद कर रहे हैं, लेकिन इसमें किसी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी।”
वर्ष 2016 में विशेष अदालत ने राणा को हत्या के साथ छेड़छाड़ के अपराध में भी दोषी ठहराया था। एक अन्य आरोपी सतीश दुलगज को भी दोनों अपराधों में दोषी पाया गया था।
हालांकि, हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान दुलगज की मृत्यु हो गई।
महिला मित्रों से कथित छेड़छाड़ का विरोध करने पर हुआ था हमला
यह मामला 20 अक्टूबर 2011 का है। मुंबई के अंधेरी इलाके में स्थित अंबोली में एक भोजनालय के बाहर कीनन सैंटोस और रूबेन फर्नांडीस पर हमला किया गया था।
दोनों ने अपनी दो महिला मित्रों के साथ कथित छेड़छाड़ कर रहे कुछ लोगों का विरोध किया था। इस दौरान हुई झड़प के बाद दोनों की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, विवाद के दौरान कीनन और रूबेन ने एक आरोपी को थप्पड़ मारा था। इसके बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देकर वहां से चले गए।
अभियोजन का आरोप था कि कुछ समय बाद आरोपी चाकू, क्रिकेट स्टंप और बांस का बड़ा डंडा लेकर वापस आए और दोनों युवकों पर जानलेवा हमला कर दिया।
वहीं, बचाव पक्ष के वकीलों ने छेड़छाड़ के आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि विवाद की शुरुआत पीड़ितों द्वारा एक आरोपी को थप्पड़ मारने के बाद हुई थी।
2016 में चार आरोपियों को सुनाई गई थी उम्रकैद
विशेष अदालत ने वर्ष 2016 में जितेंद्र राणा, सतीश दुलगज, सुनील बोथ और दीपक पिवाल को हत्या तथा अन्य अपराधों में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
इस फैसले को आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
अब हाईकोर्ट ने जितेंद्र राणा की हत्या के मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए उसकी सजा 20 साल कर दी है। दूसरी ओर, सुनील बोथ और दीपक पिवाल को हत्या के आरोप से बरी करते हुए साधारण चोट पहुंचाने के अपराध में उनकी एक साल की सजा बरकरार रखी है।
