सुप्रीम कोर्ट ने आंखों में भेंगापन (Squint Eye) बताकर उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती से बाहर की गई महिला अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के मेडिकल बोर्ड ने जांच में अभ्यर्थी की दृष्टि सामान्य पाई थी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने आकांक्षा देवी की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि अभ्यर्थी अन्य सभी शर्तें पूरी करती है, तो उसे सिविल पुलिस में कांस्टेबल पद पर नियुक्ति पत्र या कॉल लेटर जारी किया जाए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थी पहले से नियुक्त उम्मीदवारों के मुकाबले वरिष्ठता का दावा नहीं कर सकेगी।
सभी परीक्षाएं पास करने के बाद मेडिकल में हुई थी अनफिट
आकांक्षा देवी ने उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल सिविल सीधी भर्ती 2023 के तहत आवेदन किया था।
28 दिसंबर 2024 को उन्होंने कानपुर देहात की रिजर्व पुलिस लाइन में दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण सफलतापूर्वक पास किया।
इसके बाद 22 अप्रैल 2025 को उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए बुलाया गया।
मेडिकल जांच के दौरान उन्हें मौखिक रूप से बताया गया कि आंखों में भेंगापन होने के कारण वह भर्ती के लिए अयोग्य हैं।
इसके खिलाफ उन्होंने दोबारा जांच कराई, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल एवं हेड कांस्टेबल सेवा नियमावली, 2015 के नियम 15(6)(d) के तहत गठित डिवीजन मेडिकल बोर्ड ने भी 25 अप्रैल 2025 को उन्हें अनफिट घोषित कर दिया।
अभ्यर्थी को इस संबंध में कोई लिखित अस्वीकृति आदेश या टिप्पणी उपलब्ध नहीं कराई गई।
दो नेत्र विशेषज्ञों ने आंखों की रोशनी सामान्य बताई
मेडिकल बोर्ड के फैसले के बाद आकांक्षा देवी ने कानपुर के दो नेत्र विशेषज्ञों से जांच कराई।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉ. परवेज खान और यूएचएम जिला अस्पताल के डॉ. रिजवान अहमद ने उनकी दृष्टि तथा रंग पहचानने की क्षमता सामान्य पाई।
इसके आधार पर अभ्यर्थी ने 16 मई 2025 को स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराने की मांग की, लेकिन उनका आवेदन खारिज कर दिया गया।
इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जाने के आधार पर उनकी याचिका खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर KGMU में हुई दोबारा जांच
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उल्लेख किया कि इसी तरह की परिस्थितियों वाले एक अन्य मामले में भी मेडिकल बोर्ड गठित किया गया था।
15 सितंबर 2026 को कोर्ट ने KGMU, लखनऊ को नेत्र रोग विशेषज्ञों का मेडिकल बोर्ड बनाकर आकांक्षा देवी की जांच करने का निर्देश दिया।
चार डॉक्टरों की टीम ने 8 अक्टूबर 2026 को उनका परीक्षण किया।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आंखों की सर्वोत्तम सुधारित दृष्टि (Best Corrected Vision) 6/6 थी। आंखों की दिशा सीधी और उनकी गतिविधियां सामान्य सीमा में पाई गईं।
ऑर्थोप्टिक क्लिनिक की राय में एक्सोफोरिया से इंटरमिटेंट एक्सोट्रोपिया की स्थिति दर्ज की गई, लेकिन उस पर अच्छा नियंत्रण पाया गया।
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने KGMU मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए कहा कि अभ्यर्थी सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पास कर चुकी थी और उसे नियुक्ति से वंचित किया गया।
बेंच ने कहा:
“उपरोक्त रिपोर्ट हमें अपीलकर्ता की इस दलील को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती है कि सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पास करने के बावजूद उसे सिविल पुलिस में पुलिस कांस्टेबल के पद पर नियुक्त होने के अपने वैध अधिकार से वंचित किया गया।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दे रहा है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि KGMU के मेडिकल बोर्ड ने अभ्यर्थी की दृष्टि उचित और सामान्य प्रमाणित की थी।
नियुक्ति मिलेगी, लेकिन पहले से चयनित अभ्यर्थियों से वरिष्ठता नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए संबंधित अधिकारियों को आकांक्षा देवी के पक्ष में नियुक्ति आदेश या कॉल लेटर जारी करने का निर्देश दिया, बशर्ते वह अन्यथा नियुक्ति की पात्र हों।
बेंच ने स्पष्ट किया:
“यह स्पष्ट रूप से कहा जाता है कि अपीलकर्ता अब तक नियुक्त किए जा चुके उम्मीदवारों से वरिष्ठता का दावा नहीं करेगी।”
केस डिटेल्स
केस टाइटल: Akanksha Devi v. State of U.P. & Ors.
केस नंबर: Civil Appeal No. 14041 of 2026
पीठ: जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली
फैसले की तारीख: 2 नवंबर 2026
