इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को राजधानी लखनऊ में पांच वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए जमीन आवंटन और वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इन संयंत्रों की स्थापना को आवश्यक बताते हुए सरकार से परियोजनाओं की प्रगति पर रिपोर्ट मांगी है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान की ओर से दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
कोर्ट ने सरकार को चिह्नित जमीन का आवंटन पूरा कर उसे उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) को सौंपने और परियोजनाओं के लिए जरूरी वित्तीय मंजूरी प्राप्त करने का निर्देश दिया।
सीतापुर रोड प्लांट के लिए 231.52 करोड़ रुपये का प्रस्ताव कैबिनेट के पास
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि सीतापुर रोड पर प्रस्तावित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 231.52 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी का प्रस्ताव राज्य कैबिनेट के सामने रखा जा चुका है। इस पर जल्द फैसला होने की उम्मीद है।
सरकार ने यह भी बताया कि जिलाधिकारी पहले ही इस परियोजना के लिए जमीन आवंटित कर चुके हैं।
सरकार की ओर से दाखिल हलफनामों के अनुसार, चार अन्य वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए बाराबंकी रोड, कानपुर रोड, सुल्तानपुर रोड और हरदोई रोड पर जमीन चिह्नित की गई है। इन संयंत्रों की स्थापना उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के माध्यम से की जानी है।
बाकी चार प्लांट के लिए भी वित्तीय मंजूरी लेने का निर्देश
सरकार की जानकारी पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि चिह्नित जमीन के आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर उसे जल निगम को सौंपा जाए।
बेंच ने राज्य सरकार से कहा कि सीतापुर रोड परियोजना के लिए अपनाई गई प्रक्रिया के अनुसार ही अन्य चार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भी वित्तीय मंजूरी प्राप्त की जाए।
इसके अलावा कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें सीतापुर रोड परियोजना पर कैबिनेट के फैसले और बाकी चार संयंत्रों की स्थापना के लिए हुई प्रगति का विवरण देना होगा।
मामले की अगली सुनवाई एक महीने बाद होगी।
