सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को दिवाली मनाने के लिए अपने गृह जनपद लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, उन्हें पहले से लागू जमानत की शर्तों का पालन करना होगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच ने सोमवार को यह अनुमति दी। कोर्ट ने मामले के ट्रायल की प्रगति पर भी विचार किया और कहा कि सुनवाई में न तो अनावश्यक जल्दबाजी होनी चाहिए और न ही बेवजह देरी।
बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष को दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा, ताकि ट्रायल समय पर पूरा हो सके।
परिवार के साथ दिवाली मनाने के लिए मांगी थी अनुमति
आशीष मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल को दिवाली के अवसर पर अपने परिवार और करीबी रिश्तेदारों से मिलने के लिए लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी जाए।
आशीष मिश्रा फिलहाल जमानत पर हैं, लेकिन जमानत की शर्तों के तहत उनके लखीमपुर खीरी में प्रवेश करने पर रोक लगी हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने उनका अनुरोध स्वीकार करते हुए पहले से लागू शर्तों के अधीन गृह जनपद जाने की अनुमति दे दी। आदेश में उन्हें 16 अक्टूबर को वापस लौटने का निर्देश भी दिया गया।
इससे पहले 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की जमानत शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया था।
131 में से 90 गवाहों की गवाही पूरी
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले की सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारी और अभियोजन पक्ष की टीम में बदलाव हुआ है।
सरकार ने जानकारी दी कि मामले में कुल 131 गवाहों में से 90 की गवाही दर्ज की जा चुकी है।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारी का तबादला कर दिया है।
न्यायिक अधिकारी लोकेश राय ने 14 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश का पदभार संभाला था। उन्होंने शिव कुमार सिंह का स्थान लिया, जो इससे पहले इस मामले की सुनवाई कर रहे थे।
इससे पहले 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से उन आरोपों पर शीघ्र कार्रवाई करने को कहा था, जिनमें दावा किया गया था कि तत्कालीन पीठासीन अधिकारी ने कई मामलों को अपने पास स्थानांतरित कर आरोपियों को बरी कर दिया था।
इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिवक्ता कपिल कटियार को मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है। कटियार सरकारी अधिवक्ता भी हैं।
उन्होंने प्रभाकर ब्रह्म मिश्रा का स्थान लिया है, जो अपर जिला शासकीय अधिवक्ता के रूप में अभियोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
पीड़ितों की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे मामले में हुए इन बदलावों से संतुष्ट हैं।
क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा मामला?
यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में हुई हिंसा से जुड़ा है। उस समय उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था।
इस हिंसा में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की मौत हुई थी।
चार किसानों की एसयूवी से कुचले जाने के कारण मौत हुई थी। इसके बाद भड़की हिंसा में गुस्साए किसानों ने कथित तौर पर वाहन चालक और भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। घटना में एक पत्रकार की भी मौत हुई थी।
दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आशीष मिश्रा और 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न आरोप तय किए थे, जिसके बाद मामले में ट्रायल का रास्ता साफ हुआ था।
अब सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली के लिए लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति देते हुए एक बार फिर स्पष्ट किया है कि मामले की सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसे जल्दबाजी में भी पूरा नहीं किया जाना चाहिए।
