केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कथित CMRL रिश्वत मामले में FIR दर्ज करने के केरल हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। शुक्रवार को उन्होंने मामले की जल्द सुनवाई करने और अपने खिलाफ किसी भी सख्त कार्रवाई से संरक्षण देने की मांग की।
विजयन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने याचिका का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामले में FIR दर्ज हो चुकी है।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि दशहरा की छुट्टियों के बाद 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट खुलने पर मामले की सुनवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगले सप्ताह छुट्टियों के दौरान जजों की उपलब्धता के आधार पर विशेष बेंच गठित की जा सकती है।
केरल हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
इससे पहले गुरुवार को केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और दामाद पीए मोहम्मद रियास की अपील करने की अनुमति मांगने वाली अर्जियां खारिज कर दी थीं।
तीनों ने 9 अक्टूबर को सिंगल जज द्वारा FIR दर्ज करने के दिए गए आदेश को चुनौती देने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि आदेश पारित करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।
हालांकि, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी दलील स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी आरोपी को FIR दर्ज होने से पहले सुनवाई का कानूनी अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने अपील करने की अनुमति मांगने वाली अर्जियां खारिज करते हुए संबंधित अपीलों को भी खारिज कर दिया।
ED की रिपोर्ट पर FIR दर्ज करने का आदेश
केरल हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (VACB) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत की गई जांच और छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर राज्य पुलिस से आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) ने पिनराई विजयन की बेटी वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया था।
वीणा की यह कंपनी अब बंद हो चुकी है। ED का दावा है कि संबंधित रकम का भुगतान वास्तविक सेवाओं के बजाय फर्जी लेनदेन के जरिए किया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट में विजयन की याचिका पर सुनवाई होनी है, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के साथ ही उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण देने की मांग की गई है।

