इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आजमगढ़ के एक स्कूल और उससे जुड़े कोचिंग संस्थान के कामकाज की जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत यह पता लगाना चाहती है कि क्या ये संस्थान छात्रों को उनकी जानकारी के बिना डमी स्कूलों में नामांकित दिखाने का कोई नेटवर्क चला रहे हैं।
जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने 7 अक्टूबर को दिए अपने आदेश में राज्य सरकार को स्कूल प्रबंधन की भूमिका परखने और जौनपुर स्थित शाहना इंटरनेशनल स्कूल के साथ उसके कथित संबंधों की पड़ताल करने को कहा है। मामले के याचिकाकर्ता अबू हुजैफा को सीबीएसई व्यवस्था के तहत जौनपुर के इसी स्कूल में 11वीं का पंजीकृत छात्र दिखाया गया था, जबकि छात्र का कहना है कि उसने वहां कभी प्रवेश लिया ही नहीं।
अदालत ने संबंधित प्राधिकारी (दूसरे प्रतिवादी) को निर्देश दिया है कि वह जांच रिपोर्ट और अपना व्यक्तिगत हलफनामा 2 नवंबर तक पेश करे। इसके अलावा संस्थान के प्रबंधक और प्रधानाचार्य को भी अगली सुनवाई की तारीख, 2 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर रहने को कहा गया है।
याचिकाकर्ता के दावे और दस्तावेज संबंधी विसंगतियां
यह मामला अबू हुजैफा की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। छात्र के वकील ने अदालत में दलील दी कि हुजैफा कभी भी शाहना इंटरनेशनल स्कूल का छात्र नहीं रहा।
अपने प्रत्युत्तर हलफनामे में हुजैफा ने स्पष्ट किया कि उसने उस स्कूल में दाखिले के लिए न तो कभी आवेदन किया, न वहां की कक्षाओं में गया और न ही कोई फीस चुकाई।
याचिकाकर्ता ने प्रतिवादियों की ओर से पेश सीबीएसई पंजीकरण रिकॉर्ड पर भी गंभीर सवाल उठाए। अदालत के संज्ञान में लाया गया कि इस रिकॉर्ड में दाखिला फॉर्म, फीस की रसीद, पहचान पत्र, हाजिरी का ब्योरा और छात्र के हस्ताक्षर तक गायब हैं।
तारीखों और आवासीय पते का टकराव
रिकॉर्ड के अंतर को रेखांकित करते हुए याचिकाकर्ता ने बताया कि वह 5 जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक फड़गुड़िया के एक हॉस्टल में रह रहा था और इस दौरान वह एक अन्य संस्थान में परीक्षाएं दे रहा था और वहां की फीस भर रहा था।
हुजैफा के अनुसार, शाहना इंटरनेशनल स्कूल के दस्तावेजों में उसके प्रवेश की तारीख 12 अगस्त 2025 दर्ज की गई है। छात्र का कहना है कि इस तारीख से पहले ही वह दूसरे संस्थान में अपनी परीक्षाएं दे रहा था और वहां नियमित शुल्क जमा कर रहा था।
प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग और डमी स्कूल का खेल
उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद अदालत ने 7 अक्टूबर के अपने आदेश में पाया कि साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को कोचिंग किसी एक संस्थान में दी जा रही है, जबकि उनकी जानकारी के बिना उनका दाखिला किसी अन्य स्कूल में दिखाया जा रहा है।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर तय की है।

