सीएमआरएल रिश्वत मामला: केरल हाईकोर्ट ने खारिज की पिनाराई विजयन की अपील याचिका, एफआईआर दर्ज करने का रास्ता साफ

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिजनों को बड़ा झटका देते हुए उनकी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने की अनुमति मांगी थी। यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड र्यूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से जुड़े कथित रिश्वतखोरी विवाद से संबंधित है।

जस्टिस के. नटराजन और जस्टिस जॉनसन जॉन की खंडपीठ ने एकल पीठ के 9 अक्टूबर के फैसले के खिलाफ अपील की अनुमति मांगने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में 13 अक्टूबर को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

एकल पीठ ने दिया था सतर्कता ब्यूरो को जांच का आदेश

इससे पहले, 9 अक्टूबर को हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायाधीश जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी टी. वीणा और दामाद मोहम्मद रियास सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जारी किया था। मोहम्मद रियास पूर्व मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में माकपा (सीपीआई-एम) की राज्य सचिवालय समिति के सदस्य हैं।

ईडी की सिफारिश और वीणा की आईटी कंपनी पर आरोप

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यह पूरा मामला टी. वीणा की आईटी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ द्वारा कोच्चि स्थित फर्म सीएमआरएल से कथित तौर पर अवैध भुगतान प्राप्त करने से जुड़ा है। आरोप है कि यह लेन-देन माकपा के शासनकाल के दौरान हुआ था।

इस मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले महीने राज्य पुलिस को एक औपचारिक सिफारिश भेजी थी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, टी. वीणा और मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत नियमित प्राथमिकी दर्ज करने को कहा गया था।

प्राथमिक जांच पर कानूनी विवाद और अदालत का रुख

केंद्रीय एजेंसी ईडी की सिफारिश के बाद कांग्रेस नीत राज्य सरकार ने तत्काल मामला दर्ज करने के बजाय राज्य अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) से प्राथमिक जांच कराने का निर्णय लिया था। सरकार का कहना था कि प्राथमिकी दर्ज करने का फैसला इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर लिया जाएगा।

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सरकार के इस कदम को पूर्व मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन के पूर्व अतिरिक्त निजी सचिव के. एम. शाहजहां ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और सीधे एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई। इस कानूनी प्रक्रिया में ईडी भी एक पक्षकार के रूप में शामिल हुआ।

अदालत में सुनवाई के दौरान ईडी ने दलील दी कि राज्य अपराध शाखा को इस मामले में प्राथमिक जांच करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है और केंद्रीय जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया था कि जांच एजेंसियों को एफआईआर दर्ज करने से पूर्व प्राथमिक पड़ताल करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

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तमाम पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस बदरुद्दीन ने शाहजहां की याचिका स्वीकार करते हुए सतर्कता ब्यूरो को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश सुनाया था। अब खंडपीठ द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और उनके परिजनों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है।

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