जवाहर यादव हत्याकांड: पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया समेत तीन दोषियों की दूसरी जमानत अर्जी हाईकोर्ट से खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1996 के चर्चित सपा विधायक जवाहर यादव हत्याकांड में उम्रकैद की सजा भुगत रहे पूर्व बसपा सांसद कपिल मुनि करवरिया, उनके भाई और पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया तथा सह-दोषी रामचंद्र त्रिपाठी की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अंतिम सुनवाई टालकर केवल लंबी कैद की अवधि के आधार पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने दोषियों की आपराधिक अपीलों पर सुनवाई के बाद 5 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया। पीठ ने रेखांकित किया कि अपराध की भीषणता और जानबूझकर मुख्य अपील पर अंतिम बहस से बचने का आचरण दोषियों को महज जेल में बिताए गए समय के आधार पर राहत पाने का हकदार नहीं बनाता।

लंबी कैद के आधार पर राहत से इनकार

याचिकाकर्ताओं ने अपनी अर्जी में दलील दी थी कि उनकी आपराधिक अपील दो साल से अधिक समय से बिना सुनवाई के लंबित है और वे लंबे समय से जेल में हैं, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने इस आधार को अस्वीकार करते हुए कहा कि मई 2023 से अदालत लगातार अपीलकर्ताओं के वकीलों से मूल मामले पर गुण-दोष के आधार पर अंतिम बहस करने को कह रही है। इसके उलट, बचाव पक्ष मुख्य अपील की सुनवाई टालने के लिए बार-बार स्थगन मांगता रहा और केवल अल्पकालिक जमानत के लिए दबाव बनाता रहा।

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हाईकोर्ट ने इससे पहले 9 मई, 2023 को भी इन तीनों की पहली जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। इसी मामले में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले एक अन्य भाई और पूर्व विधायक उदय भान करवरिया ने दूसरी जमानत अर्जी दाखिल नहीं की थी, क्योंकि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी सजा कम कर दी थी।

एके-47 से की गई थी दिनदहाड़े हत्या

यह मामला 13 अगस्त 1996 का है, जब प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में तत्कालीन समाजवादी पार्टी विधायक जवाहर यादव (जवाहर पंडित) की दिनदहाड़े एके-47 असॉल्ट राइफल से अंधाधुंध फायरिंग कर हत्या कर दी गई थी।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2019 में ट्रायल कोर्ट ने करवरिया बंधुओं और उनके साथियों को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर रखी है।

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