सीवर लाइन जाम होने पर कार्रवाई न करना PWD को पड़ा भारी: पुडुचेरी उपभोक्ता आयोग ने लगाया 15,000 रुपये का हर्जाना, दिए मरम्मत के निर्देश

आवासीय परिसर से जुड़ी सीवर लाइन चोक होने की शिकायत पर लंबे समय तक कोई कार्रवाई न करने के मामले में पुडुचेरी जिला उपभोक्ता आयोग ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने विभाग को पीड़ित 60 वर्षीय बुजुर्ग को 15,000 रुपये का मुआवजा अदा करने और तत्काल ड्रेनेज लाइन का निरीक्षण कर सफाई व मरम्मत कराने का आदेश सुनाया है।

आयोग के अध्यक्ष एस. मुत्तुवेल तथा सदस्य ए.एस. सुविथा और जी. अरुमुगम की पीठ ने 28 अगस्त को पारित अपने आदेश में कहा कि नागरिकों द्वारा बार-बार संज्ञान में लाए जाने के बावजूद सीवर जाम की समस्या का समाधान न करना सेवा में गंभीर कमी (डेफिशिएंसी इन सर्विस) का स्पष्ट मामला है। पीठ ने बुजुर्ग उपभोक्ता को हुई मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के एवज में 10,000 रुपये और कानूनी प्रक्रिया के खर्च के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

सिर्फ शुल्क वसूली तक सीमित नहीं हो सकती विभाग की जिम्मेदारी

सार्वजनिक नागरिक सेवाओं के दायित्व को रेखांकित करते हुए उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि सीवरेज प्रणाली के रखरखाव का जिम्मा संभालने वाले विभाग की भूमिका केवल उपभोक्ताओं से बिल या शुल्क वसूलने तक ही सीमित नहीं हो सकती। पीठ ने कहा कि जब भी कोई नागरिक सीवर जाम या खराबी की विशिष्ट शिकायत दर्ज कराता है, तो संबंधित अधिकारियों का यह वैधानिक दायित्व बनता है कि वे पूरी मुस्तैदी और सावधानी के साथ तय समय में उचित कदम उठाएं।

आयोग ने रेखांकित किया कि सीवरेज और ड्रेनेज नेटवर्क अनिवार्य नागरिक सेवाएं हैं, जिनका सीधा संबंध इलाके की स्वच्छता, जनस्वास्थ्य और स्वच्छ जीवन जीने की बुनियादी परिस्थितियों से है।

READ ALSO  धारा 190 (1) (बी) सीआरपीसी: मजिस्ट्रेट धारा 164 सीआरपीसी के बयान के आधार पर एक व्यक्ति को समन कर सकता है यदि प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाई जाती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इस मामले की सुनवाई के दौरान पीडब्ल्यूडी की ओर से कोई भी प्रतिनिधि आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि विभाग की गैर-हाजिरी आयोग को मामले के गुण-दोष की निष्पक्ष समीक्षा करने से नहीं रोकती। चूंकि विभाग ऐसा कोई भी दस्तावेज या साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा जिससे यह साबित हो सके कि बुजुर्ग की शिकायत पर कोई जमीनी कार्रवाई की गई थी या सीवर का अवरोध हटाया गया था, इसलिए आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में राहत का आदेश दिया।

ड्रेनेज प्रणाली के निरीक्षण और पूर्ण मरम्मत का निर्देश

READ ALSO  HC ने SC/ST अधिनियम के तहत कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग पर महाराष्ट्र और केंद्र सरकार से विचार मांगे

उपभोक्ता आयोग ने पीडब्ल्यूडी को निर्देश जारी किया है कि वह शिकायतकर्ता के घर से जुड़े पूरे ड्रेनेज नेटवर्क का गहन मौके पर निरीक्षण करे।

निर्देश के अनुसार यदि जांच के दौरान नाली या सीवर में किसी भी प्रकार का अवरोध, तकनीकी दोष या रुकावट पाई जाती है, तो विभाग को अविलंब सभी आवश्यक उपचारात्मक कदम उठाने होंगे। इसमें सीवर की गाद निकालना (डीसिल्टिंग), मरम्मत करना और आवश्यकता पड़ने पर क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के हिस्से को पूरी तरह बदलना शामिल है, ताकि जल निकासी बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चल सके। इसके लिए उपभोक्ता को केवल नियमानुसार लागू वैध शुल्क का ही भुगतान करना होगा।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, फैला संक्रमण का खतरा

यह विवाद 6 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था, जब बुजुर्ग के घर से जुड़ी मुख्य ड्रेनेज लाइन पूरी तरह चोक हो गई। आयोग में अपने वकीलों एस. विमल और एम. धिनागरन के जरिए दायर याचिका में बुजुर्ग ने बताया कि वे पीडब्ल्यूडी की सीवरेज नीति के तहत लागू सभी शुल्कों का समय पर नियमित भुगतान कर रहे थे।

READ ALSO  पुणे कार दुर्घटना: किशोर के रक्त के नमूनों से छेड़छाड़, पुलिस ने अस्पताल के कर्मचारियों को गिरफ्तार किया

लाइन जाम होने के बाद उन्होंने तुरंत विभाग के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई। अधिकारियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर समाधान करने का आश्वासन दिया, लेकिन हकीकत में कोई कदम नहीं उठाया गया।

याचिका के अनुसार कई दिनों तक गंदा सीवेज का पानी घर के आसपास जमा रहा, जिससे असहनीय बदबू फैल गई और भारी संख्या में मच्छर व अन्य कीड़े पनपने लगे। इस अत्यधिक अस्वच्छ वातावरण से परिवार के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा और दैनिक जीवन दूभर हो गया, जिसके बाद पीड़ित को न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग की शरण लेनी पड़ी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles