मोनालिसा भोंसले का जन्म प्रमाणपत्र रद्द करने का आदेश मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने किया खारिज, नए सिरे से सुनवाई का निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2025 प्रयागराज महाकुंभ के दौरान चर्चा में आईं मोनालिसा भोंसले का जन्म प्रमाणपत्र रद्द करने संबंधी नगर निकाय के आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उनके जन्म रिकॉर्ड में बदलाव करने से पहले उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया गया था।

इंदौर बेंच के जस्टिस गजेंद्र सिंह ने खरगोन जिले के महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को निर्देश दिया कि मोनालिसा के पिता की ओर से दी गई अर्जी पर कानून के मुताबिक उन्हें प्रभावी सुनवाई का अवसर देने के बाद नए सिरे से फैसला किया जाए।

मोनालिसा की जन्मतिथि को लेकर विवाद उनके मार्च 2026 में हुए अंतरधार्मिक विवाह के बाद अहम हो गया था। पहले दर्ज जन्मतिथि को रद्द कर बाद की जन्मतिथि दर्ज किए जाने के बाद उन्हें विवाह के समय नाबालिग माना गया और उनके पति के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए।

जन्म रिकॉर्ड बदलने से पहले नहीं मिला सुनवाई का मौका

मोनालिसा के माता-पिता की अर्जी पर जून 2025 में उनका जन्म पंजीकृत किया गया था। उस रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 और जन्म स्थान घर दर्ज किया गया था।

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विवाह के बाद उनके पिता ने महेश्वर के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को बताया कि मोनालिसा का वास्तविक जन्म 30 दिसंबर 2009 को उसी स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था।

इसके बाद अस्पताल का प्रमाणपत्र नगर पालिका के रजिस्ट्रार को भेजा गया। पुराने जन्म रिकॉर्ड को रद्द कर नई जन्मतिथि दर्ज कर दी गई। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक इस बदलाव की सूचना मोनालिसा के पिता को दी गई, लेकिन मोनालिसा को स्वयं इसकी जानकारी नहीं दी गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक को प्रभावित करने वाली कार्रवाई करने से पहले राज्य या किसी सार्वजनिक प्राधिकरण को उसे सुनवाई का मौका देना जरूरी है। ऐसा न करने पर कार्रवाई अनुचित और मनमानी होगी।

इसी आधार पर कोर्ट ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी का आदेश रद्द करते हुए मामले पर फिर से निर्णय लेने का निर्देश दिया।

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सही जन्मतिथि पर हाईकोर्ट ने नहीं दिया फैसला

हाईकोर्ट ने यह तय नहीं किया कि दोनों में से कौन-सी जन्मतिथि सही है। कोर्ट ने कहा कि इस सवाल पर रजिस्ट्रार को नए सिरे से विचार करना होगा।

कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि ऐसा कोई स्कूल रिकॉर्ड उपलब्ध होता दिखाई नहीं देता, जिससे मोनालिसा की वास्तविक जन्मतिथि से जुड़ा विवाद आसानी से सुलझाया जा सके।

2025 में जन्म पंजीकरण उनकी मां के 30 मई 2025 के हलफनामे के आधार पर किया गया था। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 28 मई 2015 को जारी आधार कार्ड में पहले से ही उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी, जबकि 10 जनवरी 2026 को उन्हें पैन भी जारी किया गया था।

सिर्फ पिता को सूचना देना पर्याप्त नहीं: हाईकोर्ट

मोनालिसा के पिता की ओर से यह दलील दी गई कि मध्य प्रदेश जन्म और मृत्यु पंजीकरण नियम, 2024 के तहत सूचना केवल उस व्यक्ति को देना जरूरी है, जिसने जन्म संबंधी जानकारी दी थी। इस मामले में वह व्यक्ति उनके पिता थे।

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हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जब जन्म रिकॉर्ड में बदलाव से मोनालिसा स्वयं प्रभावित हो रही थीं, तो केवल उनके पिता को सूचना देना audi alteram partem यानी प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के सिद्धांत की पर्याप्त पूर्ति नहीं करता।

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा पेश हुए, जबकि राज्य की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने पक्ष रखा।

तन्खा ने कहा कि मामला धर्म परिवर्तन का नहीं था। उनके अनुसार विवाद जन्म प्रमाणपत्र रद्द कर नया प्रमाणपत्र जारी करने और मोनालिसा को नाबालिग दिखाए जाने से जुड़ा था, जिसके बाद अपहरण का मामला बनाया गया।

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