गोवा के मंत्री के कथित अवैध बंगले को गिराने की मांग वाली PIL पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री रमेश तावड़कर और राज्य के संबंधित अधिकारियों को उस जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें कैनाकोना स्थित एक बंगले को अवैध बताते हुए उसे गिराने की मांग की गई है।

कार्यकर्ता काशीनाथ शेट्ये और पांच अन्य लोगों ने यह PIL दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिना जरूरी वैधानिक मंजूरियों के बनाए गए इस ढांचे को नियमित करने की कोशिश की जा रही है। हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की है।

नियमित करने की कोशिश को चुनौती

याचिका के अनुसार, पोइंगुइनिम गांव में स्थित 527 वर्ग मीटर का यह बंगला करीब 2015 में बनाया गया था और इसके लिए जरूरी अनुमतियां नहीं ली गई थीं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मंत्री ने 13 जनवरी 2025 को पोइंगुइनिम ग्राम पंचायत में आवेदन दिया था। इसके बाद 20 जनवरी 2025 को मकान संख्या EHN/R9/30 जारी कर दी गई। PIL में 16 जनवरी 2025 के एक हलफनामे और 22 दिसंबर 2022 के आर्किटेक्चरल प्लान का भी उल्लेख किया गया है।

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याचिकाकर्ताओं ने ढांचे को नियमित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह Goa Regularisation of Unauthorised Construction Act, 2016 के तहत पात्र नहीं है।

कट-ऑफ तारीख और क्षेत्रफल का हवाला

याचिका में कहा गया है कि 2016 का कानून केवल 28 फरवरी 2014 से पहले बने अनधिकृत निर्माणों पर लागू होता है, जबकि संबंधित बंगले का निर्माण करीब 2015 में किए जाने का आरोप है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि कानून के तहत निजी आवासीय ढांचे के लिए अधिकतम 200 वर्ग मीटर तक के बिल्ट-अप एरिया को नियमित किया जा सकता है, जबकि इस बंगले का क्षेत्रफल कथित तौर पर 527 वर्ग मीटर है।

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PIL में कानून की धारा 6 का भी हवाला दिया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कलेक्टर और मामलतदार सहित संबंधित अधिकारियों को उन अनधिकृत निर्माणों की पहचान कर उन्हें गिराना था, जिनके लिए तय समय के भीतर आवेदन नहीं किया गया था।

2021 के पंचायत सर्कुलर को भी चुनौती

याचिकाकर्ताओं ने अक्टूबर 2021 में पंचायत निदेशक द्वारा जारी एक सर्कुलर को भी चुनौती दी है। उनका आरोप है कि यह सर्कुलर वैधानिक व्यवस्था के विपरीत अनधिकृत निर्माणों को नियमित करने का रास्ता देता है।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह की नियमितीकरण प्रक्रिया मनमानी होगी और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करेगी।

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याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से निर्माण को अवैध घोषित करने और लागू भूमि विकास तथा पंचायत कानूनों के तहत उसे गिराने का निर्देश देने की मांग की है।

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