सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका पर 5 अक्टूबर को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है, जिसमें नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को मिली अंतरिम जमानत को चुनौती दी गई है। प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज छह आपराधिक मुकदमों में यह राहत प्रदान की गई थी।
सीजेआई की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल ने उठाया मामला
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को इस मामले को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए पेश किया। पीठ से त्वरित सुनवाई की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि उम्मीदवार को केवल चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने के उद्देश्य से अंतरिम जमानत दी गई है। उनकी दलीलों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले पर 5 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित की।
हाईकोर्ट ने दी थी 20 अक्टूबर तक राहत, 21 को करना होगा आत्मसमर्पण
इससे पहले मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक के लिए अंतरिम जमानत मंजूर की थी, ताकि वह नंदीग्राम सीट पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए अपना चुनाव प्रचार कर सकें। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उन्हें 21 अक्टूबर को संबंधित निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का स्पष्ट निर्देश भी दिया था।
हत्या और आर्म्स एक्ट के छह मामले, मुख्यमंत्री के सीट छोड़ने से हो रहा उपचुनाव
नंदीग्राम विधानसभा सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे से खाली हुई है। उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में संपन्न हुए राज्य विधानसभा चुनावों में दो सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसके बाद उन्होंने भवानीपुर सीट को अपने पास बरकरार रखते हुए नंदीग्राम सीट छोड़ दी थी।
वहीं, कांग्रेस के प्रत्याशी मिलन प्रधान 2007 के चर्चित नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के समय दर्ज छह आपराधिक मामलों में आरोपी हैं। उन पर हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट (हथियार कानून) के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोपों के तहत मुकदमे दर्ज हैं।

