दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें रेड बुल को अपने पेय उत्पादों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को जवाब देने या अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
जस्टिस अमित महाजन ने रेड बुल की याचिका को सीमित आधार पर स्वीकार करते हुए कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने FSSAI को उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए मामले पर दोबारा निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी।
कोर्ट ने कहा कि यह निर्विवाद है कि FSSAI का 30 जून का आदेश रेड बुल को जवाब दाखिल करने या स्पष्टीकरण देने का अवसर दिए बिना पारित किया गया था।
हाईकोर्ट ने आदेश रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि FSSAI चाहे तो रेड बुल को कारण बताओ नोटिस जारी कर, सुनवाई का अवसर देने के बाद नया निर्णय ले सकता है।
FSSAI ने कहा, आपत्ति केवल ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द पर
सुनवाई के दौरान FSSAI ने कोर्ट को बताया कि रेड बुल को अलग से कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था। प्राधिकरण की ओर से कहा गया कि 30 जून का पत्र ही नोटिस के रूप में था।
FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी आपत्ति रेड बुल के उत्पाद पर नहीं, बल्कि केवल ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।
30 जून के निर्देश को रेड बुल ने दी थी चुनौती
रेड बुल ने FSSAI के 30 जून के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। उस आदेश में कंपनी को अपने पेय उत्पादों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का इस्तेमाल बंद करने को कहा गया था।
कंपनी ने कोर्ट में कहा कि वह भारत में वर्ष 2002 से अपने पेय उत्पादों के लिए ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द का इस्तेमाल कर रही है। रेड बुल ने यह भी दलील दी कि FSSAI ने पहले कैफीन युक्त पेय पदार्थों की संबंधित श्रेणी में इस शब्द के इस्तेमाल को मान्यता दी थी।
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 30 जून का आदेश रद्द कर दिया और FSSAI को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा कंपनी को सुनवाई का अवसर देने के बाद नया आदेश पारित करने की स्वतंत्रता दी।

