कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कोलाघाट स्थित एक परिसर में हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी थी। अदालत का यह आदेश पूर्व मेदिनीपुर जिला पुलिस की उस रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि तलाशी के दौरान मौके से कोई भी आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई थी।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ में सुनवाई के दौरान शुभेंदु अधिकारी के अधिवक्ता मयूख मुखर्जी ने कहा कि पुलिस द्वारा स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद उनका मुवक्किल अब इस याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। इस पर संज्ञान लेते हुए जस्टिस भट्टाचार्य ने याचिका को ‘नॉट प्रेस्ड’ (आगे न बढ़ाने के आधार पर) मानते हुए निस्तारित कर दिया।
पुलिस रिपोर्ट में गलतफहमी का हवाला
कोलाघाट थाने के प्रभारी की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू रहने के समय सूत्रों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर कोलाघाट स्थित एक आवास में छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया गया था।
अदालत में पेश रिपोर्ट में साफ किया गया कि परिसर की गहन तलाशी के बावजूद कोई भी गैरकानूनी या आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली। पुलिस ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि यह पूरी कार्रवाई संभवतः किसी गलतफहमी या अधूरी सूचना के आधार पर हुई प्रतीत होती है।
देसी बम और नकदी की सूचना पर दर्ज हुआ था मामला
इस कानूनी विवाद की शुरुआत 22 मई 2024 को हुई थी, जब कोलाघाट थाने के तत्कालीन प्रभारी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक एफआईआर दर्ज की थी। अधिवक्ता मयूख मुखर्जी ने अदालत को बताया कि पुलिस ने यह मामला उस सूचना के आधार पर दर्ज किया था, जिसमें परिसर में देसी बम और भारी नकदी रखे होने का दावा किया गया था।
उस समय नेता प्रतिपक्ष रहे शुभेंदु अधिकारी का नाम इस मामले में सामने आने के बाद उन्होंने पुलिस कार्रवाई और स्वतः संज्ञान प्राथमिकी को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 24 मई 2024 को अंतरिम राहत देते हुए इस प्राथमिकी की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद अब पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर याचिका का औपचारिक निपटारा हो गया।

