उचित कारण से अलग रह रही पत्नी को धारा 9 हिंदू विवाह अधिनियम के तहत साथ रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना का आदेश केवल इस आधार पर नहीं दिया जा सकता कि पति या पत्नी अलग रह रहे हैं। यह भी साबित होना चाहिए कि दूसरे जीवनसाथी के साथ न रहने का कोई उचित कारण नहीं था। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ पति की अपील खारिज कर दी, जिसमें दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना की उसकी अर्जी नामंजूर कर दी गई थी।

हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी ने अलग रहने के लिए उचित और स्वीकार्य कारण बताए थे। इनमें कथित मारपीट, दुर्व्यवहार, दहेज की मांग, गर्भपात से जुड़ी परिस्थितियां, घरेलू हिंसा की कार्यवाही और पति द्वारा उसके शैक्षणिक व अन्य दस्तावेज अपने पास रखे जाने का मामला शामिल था।

क्या था मामला

दोनों की शादी 7 फरवरी 2022 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। पति के अनुसार, अक्टूबर 2022 तक उनके संबंध सामान्य थे। 19 अक्टूबर 2022 को पत्नी की मां के बीमार होने की सूचना मिलने पर वह उसे उसके मायके छोड़ आया।

पति का दावा था कि इसके बाद वह कई बार पत्नी को वापस लाने गया। उसने 23 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 7 नवंबर और 11 नवंबर 2022 को उसके मायके जाने की बात कही। उसके माता-पिता भी 24 नवंबर 2022 को पत्नी को वापस लाने गए, लेकिन उसने लौटने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी।

पति ने पत्नी को वापस लाने के लिए सीआरपीसी की धारा 97 और 98 के तहत एसडीओ पत्थलगांव के समक्ष आवेदन भी किया था, जिसे 31 मार्च 2023 को खारिज कर दिया गया। उसने 6 मार्च 2023 को कानूनी नोटिस भी भेजा था। इसके बाद उसने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत फैमिली कोर्ट का रुख किया।

फैमिली कोर्ट, जशपुर ने 20 नवंबर 2023 को पति का मुकदमा खारिज कर दिया था। इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

READ ALSO  ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में प्रार्थना करने की अनुमति मांगने वाले हिंदू उपासकों द्वारा दायर सूट की पोषणीयता के पक्ष में वाराणसी कोर्ट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में दी गई चुनौती

पत्नी ने लगाया दहेज मांग और मारपीट का आरोप

पत्नी ने पति की अर्जी का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि उसके साथ पति और उसके परिवार के सदस्यों ने दुर्व्यवहार और मारपीट की। उसने कहा कि शादी में उसके परिवार की ओर से दी गई स्विफ्ट कार को कम कीमत की बताते हुए शादी के कुछ समय बाद ही क्रेटा कार और 5 लाख रुपये नकद की मांग शुरू कर दी गई।

पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट और उत्पीड़न के कारण उसका गर्भपात हुआ। उसने सखी सेंटर, जशपुर सहित विभिन्न अधिकारियों के समक्ष शिकायत करने और घरेलू हिंसा से संबंधित कार्यवाही शुरू करने की भी बात कही।

उसका यह भी आरोप था कि पति ने उसके शैक्षणिक प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाणपत्र और बैंक पासबुक अपने पास रख लिए थे।

पति ने कहा, आरोप झूठे और बिना सबूत के

हाईकोर्ट में पति की ओर से दलील दी गई कि फैमिली कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का सही तरीके से आकलन नहीं किया। उसके वकील ने कहा कि दहेज मांग, मारपीट और उत्पीड़न के आरोप झूठे, बाद में लगाए गए और विश्वसनीय साक्ष्य से समर्थित नहीं थे।

READ ALSO  चिकित्सा लापरवाही के दावे के बाद पटना अस्पताल को 40 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश

पति का कहना था कि वह हमेशा वैवाहिक जिम्मेदारियां निभाने और संबंध बहाल करने के लिए तैयार था। उसने पत्नी को वापस लाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन पत्नी ही वापस नहीं आई।

दूसरी ओर, पत्नी की ओर से कहा गया कि वह बिना किसी कारण पति से अलग नहीं हुई थी। पति और उसके परिवार के लगातार दुर्व्यवहार, शारीरिक हिंसा और दहेज की मांग के कारण उसे मायके में रहना पड़ा।

सिर्फ अलग रहना पर्याप्त नहीं, उचित कारण का सवाल भी अहम

हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 9 के तहत सवाल केवल यह नहीं है कि पत्नी पति से अलग रह रही है या नहीं। यह भी देखना जरूरी है कि उसका अलग रहना पर्याप्त और उचित कारण के बिना था या नहीं।

कोर्ट ने कहा:

“सवाल केवल यह नहीं है कि पत्नी ने पति का साथ छोड़ दिया है, बल्कि यह है कि क्या उसने बिना पर्याप्त और उचित कारण के ऐसा किया।”

बेंच ने कहा कि पत्नी द्वारा लगाए गए दुर्व्यवहार, मारपीट, क्रेटा कार और 5 लाख रुपये की मांग तथा गर्भपात से जुड़ी परिस्थितियों को घरेलू हिंसा और अन्य शिकायतों के संदर्भ में एक साथ देखा जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों को यह तय करते समय नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि पत्नी के पास अलग रहने का उचित कारण था या नहीं।

हाईकोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि पति ने पत्नी के शैक्षणिक और अन्य सार्वजनिक दस्तावेज अपने पास रखे और बार-बार मांगने के बावजूद उन्हें वापस नहीं किया। फैमिली कोर्ट ने भी इन दस्तावेजों को लौटाने का निर्देश दिया था।

पति का बार-बार मायके जाना अपने आप में पर्याप्त नहीं

READ ALSO  केरल में फर्जी प्रमाणपत्र मामले में अदालत ने पूर्व एसएफआई नेता को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया

हाईकोर्ट ने पति की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि पत्नी को वापस लाने के लिए उसके कई प्रयास और कानूनी नोटिस यह साबित करने के लिए पर्याप्त थे कि पत्नी बिना उचित कारण अलग रह रही थी।

कोर्ट ने कहा:

“केवल यह तथ्य कि पति कई बार पत्नी के मायके गया या उसने वैवाहिक सहवास फिर से शुरू करने की इच्छा जताते हुए कानूनी नोटिस भेजा, अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पत्नी का वापस लौटने से इनकार बिना उचित कारण के था।”

बेंच ने कहा कि पति की बाद की सहमति और साथ रहने की इच्छा को पक्षकारों के बीच मौजूद परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के संदर्भ में देखना होगा।

अपील खारिज

सभी तथ्यों, दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का समग्र आकलन करते हुए हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले में कोई ऐसी अवैधता, गंभीर त्रुटि या विकृति नहीं पाई जिसमें हस्तक्षेप की जरूरत हो।

कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत पति की अर्जी खारिज किए जाने के फैसले की पुष्टि की और अपील खारिज कर दी।

केस टाइटल: प्रवीण कुमार यादव बनाम श्रीमती प्रियंका यादव
केस नंबर: FA(MAT) No. 5 of 2024
बेंच: जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत
तारीख: 18 सितंबर 2026

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles