कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रत्याशी हसीरानी रथ की उम्मीदवारी को चुनौती दी गई थी। कांग्रेस ने रथ के चुनावी हलफनामे में दर्ज उम्र और 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के वर्ष में विसंगति का आरोप लगाते हुए उनका नामांकन रद्द करने की मांग की थी।
जस्टिस कृष्णा राव ने अदालत में फैसला सुनाते हुए राज्य कांग्रेस की याचिका निरस्त कर दी। इस मामले में 25 सितंबर को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत आदेश शुक्रवार को बाद में हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाने की संभावना है।
चुनावी हलफनामे में उम्र और शिक्षा के वर्ष पर उठा था विवाद
कांग्रेस ने 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव के लिए दाखिल हलफनामे को लेकर याचिका दायर की थी। पार्टी का दावा था कि रथ ने अपनी उम्र 60 वर्ष से अधिक दर्शाई है, जबकि 10वीं पास करने का साल 1965 दर्ज किया है। कांग्रेस के अनुसार, इन दोनों जानकारियों में उम्र का एक बड़ा अंतर दिखाई देता है।
प्रदेश कांग्रेस के वकील रित्जु घोषाल ने अदालत में दलील दी थी कि प्रत्याशियों द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों और हलफनामे की पड़ताल करना चुनाव आयोग का वैधानिक दायित्व है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि चुनाव आयोग को भाजपा प्रत्याशी द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की औपचारिक जांच करने का निर्देश दिया जाए।
चुनाव आयोग ने प्रक्रिया और नियमों का दिया हवाला
याचिका का विरोध करते हुए भारत निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया कि इस मामले में प्रदेश कांग्रेस का कोई कानूनी हक (लोकस स्टैंडाई) नहीं बनता, क्योंकि उसे प्रत्याशियों के नामांकन की संवीक्षा (स्क्रूटनी) पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
आयोग के वकील जिष्णु चौधरी ने अदालत को बताया कि आगामी 6 अक्टूबर के उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच 17 सितंबर को पूरी हो चुकी थी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस चरण में आपत्ति दर्ज नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि किसी कथित गलत बयान को प्रत्याशी का नामांकन खारिज करने का आधार नहीं माना जा सकता।
वहीं आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस नायडू ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि चुनाव लड़ने के लिए कानूनन कोई अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं है। ऐसे में उम्र से जुड़े कथित अंतर को कोई गंभीर या ऐसा बुनियादी दोष नहीं माना जा सकता जिसके आधार पर रथ की उम्मीदवारी निरस्त की जाए।

