यौन उत्पीड़न मामला: बृजभूषण की रिहाई के खिलाफ महिला पहलवान पहुंचीं सेशंस कोर्ट, ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी चुनौती

महिला पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में उनके बरी होने के आदेश को दिल्ली की एक सेशंस कोर्ट में चुनौती दी है। पहलवानों की इस अपील पर राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज दिग विनय सिंह की अदालत में शनिवार सुबह 10 बजे सुनवाई होगी।

निचली अदालत के फैसले पर उठाए गंभीर सवाल

अपनी याचिका में महिला पहलवानों ने दलील दी है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला पूरी तरह से “आदर्श पीड़ित मानक” (आईडियल विक्टिम स्टैंडर्ड) की रूढ़िवादी धारणा पर आधारित रहा। उन्होंने कहा कि अदालत ने इस बात पर अनुचित जोर दिया कि किसी पीड़ित को किस तरह का आचरण “करना चाहिए”। पहलवानों ने आदेश को पुरातन बताते हुए आरोप लगाया कि यह पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के त्रुटिपूर्ण और चुनिंदा मूल्यांकन पर टिका है। याचिका के अनुसार, अदालत ने निष्पक्ष और तथ्यपरक विश्लेषण के बजाय यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के “अपेक्षित व्यवहार” से जुड़ी धारणाओं को प्राथमिकता दी।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि अदालत ने पीड़िताओं के बयानों को केवल इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि वे घटनाओं की सही तारीखें किसी फोटोग्राफिक सटीकता के साथ याद नहीं रख पाईं। इसके साथ ही, खेल करियर पर आरोपी का पूरा नियंत्रण होने के बावजूद पेशेवर संबंध बनाए रखने और तुरंत जवाबी प्रतिरोध न करने को आधार बनाकर आरोपों को झुठलाना गलत है। याचिका में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने तुरंत विरोध न जताए जाने को बार-बार इस बात का प्रमाण मान लिया कि आरोप झूठे हैं।

ट्रायल कोर्ट ने साजिश और बयानों में विरोधाभास का दिया था हवाला

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इससे पहले 3 अगस्त को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार की अदालत ने छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के तीन साल से अधिक समय बाद बृजभूषण को बरी कर दिया था। उसी आदेश में महासंघ के तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर को भी बरी किया गया था।

ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में आरोपों को झूठा, मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित करार दिया था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि दो पीड़िताओं (‘पी’ और ‘आई पी’) के बयानों ने अभियोजन पक्ष के मामले को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। अदालत का मानना था कि ये आरोप ‘वी पी’, ‘बी पी’ और महादेव अकादमी के कोचों के इशारे पर एक गहरी राजनीतिक साजिश के तहत लगाए गए थे।

निचली अदालत ने अपने फैसले में यह भी दर्ज किया था कि पहलवानों ने खेल करियर खत्म होने के डर से समय पर आरोप नहीं लगाए थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि जब उन्होंने शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत जुटाई, तो कथित घटना के देश और वर्ष का गलत ब्यौरा दे दिया। अदालत के अनुसार, प्रारंभिक बयान में घटना के वर्ष और देश को लेकर सामने आया यह बड़ा विरोधाभास अभियोजन की पूरी कहानी के लिए घातक साबित हुआ।

तीन साल चली अदालती प्रक्रिया और गवाहों की स्थिति

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इस मामले में ट्रायल चार्जशीट दाखिल होने के तीन साल बाद पूरा हुआ, जिस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 32 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।

शुरुआती शिकायत में छह महिला पहलवान शामिल थीं। इनमें से दो पहलवानों ने आरोप लगाया था कि बृजभूषण ने सांस लेने का तरीका जांचने के बहाने उन्हें गलत और यौन तरीके से छुआ था। अदालती कार्यवाही के दौरान छह में से दो शिकायतकर्ता अपने बयानों से मुकर गईं (होस्टाइल हो गईं), जबकि एक अन्य शिकायतकर्ता के आरोपों पर अदालत ने आरोप तय नहीं किए थे।

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