पश्मीना कपड़े खराब करने पर ड्राई क्लीनर को ₹59,000 देने का आदेश, उपभोक्ता आयोग का फैसला

श्रीनगर के एक उपभोक्ता आयोग ने ड्राई क्लीनिंग के दौरान महिला के कपड़े खराब होने के मामले में सेवा में कमी मानते हुए ड्राई क्लीनर को कुल ₹59,000 का भुगतान करने का निर्देश दिया है। खराब हुए कपड़ों में पश्मीना शॉल और पश्मीना फेरन भी शामिल थे।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. फराह दीबा और सदस्य शबनम मुंशी ने 19 सितंबर को शिकायत पर सुनवाई करते हुए कहा कि व्हाट्सऐप संदेशों से यह सामने आया कि ड्राई क्लीनर ने अपने कर्मचारियों से कपड़े खराब होने की बात स्वीकार की थी। आयोग ने यह भी दर्ज किया कि कपड़ों को ठीक करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें पहले जैसी स्थिति में नहीं लाया जा सका।

महिला ने 18 कपड़ों की ड्राई क्लीनिंग के लिए ₹5,970 का भुगतान किया था। यह भुगतान 26 मार्च 2024 को किया गया था। शिकायत के अनुसार, इन कपड़ों में पश्मीना शॉल और पश्मीना फेरन भी शामिल थे और खराब हुए कपड़ों की कीमत ₹47,000 से अधिक थी।

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कपड़े लौटाए गए तो मिले खराब

महिला ने शिकायत में कहा कि उसने विज्ञापनों के जरिए ड्राई क्लीनिंग सेवा के बारे में जानकारी मिलने के बाद सेवा प्रदाता से संपर्क किया था। उसे बेहतर सेवा का भरोसा दिया गया था।

महिला के अनुसार, ड्राई क्लीनिंग के बाद जब कपड़े वापस मिले तो उनमें से कई खराब थे। इनमें पश्मीना शॉल और फेरन भी शामिल थे।

इसके बाद महिला ने ड्राई क्लीनर से संपर्क किया। आरोप है कि उसे भरोसा दिया गया कि शॉल और फेरन को या तो बदला जाएगा या उनकी कीमत का भुगतान किया जाएगा।

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महिला ने कहा कि बार-बार अनुरोध और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद उसकी शिकायत का समाधान नहीं किया गया। इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न तथा आर्थिक नुकसान का आरोप लगाया। आयोग के समक्ष उसकी ओर से अधिवक्ता बी ए शाह पेश हुए।

व्हाट्सऐप चैट में नुकसान की बात स्वीकार

आयोग ने यह भी नोट किया कि ड्राई क्लीनर ने मामले का विरोध नहीं किया और न ही आयोग के समक्ष अपना जवाब दाखिल किया।

व्हाट्सऐप बातचीत का उल्लेख करते हुए आयोग ने पाया कि सेवा प्रदाता ने स्वीकार किया था कि उसके कर्मचारियों के काम करने के दौरान कपड़ों को नुकसान पहुंचा था।

आयोग ने यह भी दर्ज किया कि खराब हुए कपड़ों को ठीक करने की कोशिश की गई थी, लेकिन उन्हें बहाल नहीं किया जा सका।

इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने माना कि ड्राई क्लीनर ने सेवा देने में कमी की और इसके कारण महिला को मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

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आयोग ने यह भी कहा कि शिकायत का समाधान नहीं करने और महिला की बात का जवाब नहीं देने से उसकी परेशानी और बढ़ी।

₹47,000 कपड़ों की कीमत, ₹10,000 मुआवजा

आयोग ने ड्राई क्लीनर को खराब हुए कपड़ों की कीमत के रूप में ₹47,000 देने का निर्देश दिया।

इसके अलावा ₹10,000 मुआवजा और ₹2,000 मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया गया। इस तरह महिला को कुल ₹59,000 का भुगतान किया जाएगा।

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