दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चित्रा रामकृष्ण को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत बरकरार रखी। अदालत ने कर्मचारियों के कथित अवैध फोन टैपिंग मामले में रामकृष्ण को मिली जमानत को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस मधु जैन ने निचली अदालत के 22 दिसंबर 2022 के उस फैसले के खिलाफ सीबीआई की अपील को अस्वीकार कर दिया, जिसके जरिए रामकृष्ण को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया था। मामले में हाईकोर्ट के विस्तृत फैसले की प्रति अभी प्रतीक्षित है।
अवैध फोन टैपिंग और साजिश के आरोप
सीबीआई की प्राथमिकी (एफआईआर) के मुताबिक, रामकृष्ण समेत एनएसई के शीर्ष अधिकारियों पर निजी कंपनी ‘आईसेक प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। जांच एजेंसी का आरोप है कि एक्सचेंज और उसके कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी करने के इरादे से इस कंपनी को कर्मचारियों के फोन कॉल की गैर-कानूनी इंटरसेप्शन (टैपिंग) के काम में लगाया गया था।
एक्सचेंज में नेतृत्व का सफर
चित्रा रामकृष्ण कई वर्षों तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शीर्ष प्रबंधकीय पदों पर कार्यरत रहीं। उन्हें 2009 में एक्सचेंज का संयुक्त प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया था, जिस पद पर वह 31 मार्च 2013 तक रहीं। इसके बाद 1 अप्रैल 2013 को पदोन्नत होकर उन्होंने प्रबंध निदेशक और सीईओ का पदभार संभाला। दिसंबर 2016 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके साथ ही संस्थान में उनका कार्यकाल समाप्त हो गया।

