जम्मू में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की बेंच के लिए नए कार्यालय और अदालत परिसर की शुरुआत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की कमी को लेकर दायर चार साल पुरानी जनहित याचिका का सोमवार को निपटारा कर दिया। केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया कि जम्मू के बाहू प्लाजा में अधिकरण का नया परिसर रविवार से विधिवत शुरू हो चुका है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र के इस बयान को रिकॉर्ड पर दर्ज करते हुए अचल शर्मा द्वारा 2020 में दायर जनहित याचिका की कार्यवाही समाप्त कर दी। इसके साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता को यह छूट भी दी कि यदि भविष्य में अधिकरण के संचालन या सुविधाओं को लेकर कोई नई समस्या उत्पन्न होती है, तो वे दोबारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
सुलभ और त्वरित न्याय की दिशा में कदम
रविवार को बाहू प्लाजा स्थित इस नए कोर्ट-कम-ऑफिस परिसर का औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया था। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि यह नया आधुनिक परिसर सेवा संबंधी मामलों में कर्मचारियों को त्वरित, किफायती और सुलभ न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम पड़ाव है।
देशभर में 93 प्रतिशत से अधिक मामलों का निस्तारण
अधिकरण के समग्र कामकाज का ब्योरा साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 1985 में अपनी स्थापना से लेकर 30 जून 2026 तक देशभर की सभी कैट पीठों में कुल 10,01,177 मामले दायर किए गए। इनमें से 9,32,723 मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जो 93.16 प्रतिशत की संचयी समाधान दर को दर्शाता है।
जम्मू और श्रीनगर बेंच का प्रदर्शन
जितेंद्र सिंह ने बताया कि जम्मू और श्रीनगर बेंच का कार्यभार विशेष रूप से काफी अधिक था, क्योंकि नई याचिकाओं के साथ-साथ तत्कालीन जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट से भी बड़ी संख्या में मुकदमे यहां स्थानांतरित किए गए थे।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष 30 जून तक हाईकोर्ट से इन दोनों बेंचों को 20,984 मामले स्थानांतरित किए गए थे, जबकि 20,405 नए मामले सीधे इन बेंचों में दायर हुए। अधिकरण ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए स्थानांतरित मामलों में से 18,392 और नए मुकदमों में से 13,952 मामलों का सफल निस्तारण कर दिया है।

