जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, कांगड़ा ने सेकेंड-हैंड लग्जरी कार के एक मामले में कार डीलर को खरीदार के ₹3.52 लाख वापस करने का आदेश दिया है। आयोग ने पाया कि पूरी रकम लेने के बाद डीलर ने खराबियां ठीक करने के लिए कार वापस ली, लेकिन इसके बाद न तो वाहन खरीदार को लौटाया और न ही उसकी रकम वापस की।
आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा और सदस्य आरती सूद व नारायण ठाकुर की पीठ ने डीलर को ₹3.52 लाख रिफंड करने के साथ मानसिक परेशानी के लिए ₹30,000 मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹7,500 देने का निर्देश दिया।
3 सितंबर के आदेश में आयोग ने कहा कि मरम्मत करने के बहाने वाहन को वापस अपने कब्जे में लेना, वाहन और पूरी भुगतान राशि दोनों अपने पास रखना तथा कार की डिलीवरी या रकम वापस करने के खरीदार के अनुरोधों की अनदेखी करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।
तीन किस्तों में दिए थे ₹3.52 लाख
शिकायत के मुताबिक, खरीदार ने डीलर से एक सेकेंड-हैंड लग्जरी कार खरीदने का सौदा किया था। डीलर की बातों पर भरोसा करते हुए उसने उसी दिन गूगल पे के जरिए शुरुआती टोकन राशि के रूप में ₹90,000 ट्रांसफर किए।
इसके बाद 25 जून 2024 को डीलर ने कार की सर्विस और मरम्मत के लिए ₹45,000 मांगे। शिकायतकर्ता ने यह रकम भी गूगल पे से दे दी। बाद में 27 अगस्त 2024 को शिकायतकर्ता के पिता के खाते से डीलर के खाते में ₹2.10 लाख और ट्रांसफर किए गए।
इस तरह कार की खरीद और मरम्मत के लिए डीलर को कुल ₹3.52 लाख का भुगतान किया गया।
डिलीवरी के बाद सामने आईं कार में खराबियां
शिकायतकर्ता का कहना था कि कार मिलने के तुरंत बाद उसमें गंभीर समस्याएं सामने आईं। इनमें खास तौर पर बैटरी और वाहन की सामान्य मैकेनिकल स्थिति से जुड़ी खराबियां शामिल थीं।
जब इन समस्याओं की जानकारी डीलर को दी गई तो उसने खराबियां ठीक करने का भरोसा दिया और कार को वापस अपने कब्जे में ले लिया। डीलर ने आश्वासन दिया था कि मरम्मत के बाद वाहन अच्छी कार्यशील स्थिति में वापस कर दिया जाएगा।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, इसके बाद डीलर ने कार नहीं लौटाई और लगातार बहाने बनाता रहा। आखिरकार उसने न तो वाहन देने और न ही भुगतान की गई रकम वापस करने की बात मानी।
इसके बाद खरीदार ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग का रुख किया। डीलर आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ, जिसके बाद उसके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई।
बैंक रिकॉर्ड से भुगतान साबित
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने हलफनामों और बैंक रिकॉर्ड के जरिए यह साबित किया कि सेकेंड-हैंड लग्जरी कार की खरीद और मरम्मत के लिए तीन किस्तों में कुल ₹3.52 लाख का भुगतान किया गया था।
आयोग के मुताबिक, पूरी तय रकम लेने के बावजूद खरीदार को मैकेनिकली सही और चलने योग्य वाहन उपलब्ध नहीं कराना बुनियादी संविदात्मक दायित्वों को पूरा करने में विफलता है।
आयोग ने यह भी पाया कि मरम्मत का भरोसा देकर वाहन वापस लेने के बाद खरीदार की रकम और कार दोनों अपने पास रखना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।
इन निष्कर्षों के आधार पर आयोग ने डीलर को शिकायतकर्ता के ₹3.52 लाख वापस करने के साथ मानसिक परेशानी के लिए ₹30,000 मुआवजा और मुकदमे के खर्च के तौर पर ₹7,500 देने का आदेश दिया।

