दिल्ली हाईकोर्ट ने 2023 के कंझावला हिट-एंड-ड्रैग मामले में कार के कथित ड्राइवर अमित खन्ना को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हत्या के आरोपों की गंभीरता और जिस तरीके से अपराध को कथित तौर पर अंजाम दिया गया, उसे देखते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।
जस्टिस गिरीश कठपालिया ने मामले में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य सामग्री पर विचार करते हुए खन्ना की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह मामला 20 वर्षीय अंजलि सिंह की मौत से जुड़ा है, जिनकी स्कूटी को 2023 में नए साल के पहले दिन तड़के एक कार ने टक्कर मार दी थी। इसके बाद वह कार के नीचे फंस गईं और उन्हें सुल्तानपुर से कंझावला तक 12 किलोमीटर से अधिक दूरी तक घसीटा गया।
कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि कथित तौर पर कार अमित खन्ना को चलाने के लिए दी गई थी। कार से अंजलि की स्कूटी को टक्कर लगने और उनका शरीर वाहन के नीचे फंसने के बाद भी आरोपी कथित रूप से कार चलाता रहा।
हाईकोर्ट ने यह भी गौर किया कि बाद में आरोपी ने कार रोकी और नीचे उतरा। कोर्ट के अनुसार, अंजलि को कार के नीचे फंसा देखने के बावजूद वह कथित तौर पर दोबारा वाहन चलाता रहा और कार को 13 किलोमीटर तक आगे ले गया।
इन परिस्थितियों को देखते हुए जस्टिस कठपालिया ने कहा कि हत्या के आरोप की गंभीरता और उसे कथित तौर पर अंजाम देने का तरीका आरोपी को जमानत देने के पक्ष में नहीं है।
लंबी हिरासत और सह-आरोपियों को मिली जमानत का दिया हवाला
अमित खन्ना ने अपनी जमानत अर्जी में कहा था कि वह 1 जनवरी 2023 से हिरासत में है और उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। उसके वकील ने यह भी दलील दी कि मामले के अन्य सभी सह-आरोपियों को पहले ही रिहा किया जा चुका है।
बचाव पक्ष ने घटना के समय अंजलि के साथ स्कूटी पर पीछे बैठी निधि के बयान पर भी सवाल उठाए। खन्ना के वकील ने कहा कि निधि ने आरोपी को कार के ड्राइवर के रूप में पहचान सकने की बात पहली बार अपने तीसरे बयान में कही थी, जो घटना के करीब एक सप्ताह बाद दर्ज किया गया था।
बचाव पक्ष ने निधि की गवाही का हवाला देते हुए यह भी कहा कि अंजलि और निधि एक पार्टी से लौट रही थीं और अंजलि ने काफी शराब पी रखी थी।
खन्ना की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपी दिखाई नहीं देता और जांच अधिकारी ने अब तक ‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम’ के नतीजे रिकॉर्ड पर नहीं रखे हैं।
दिल्ली पुलिस ने कहा, कार चला रहा था अमित खन्ना
दिल्ली पुलिस ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि घटना के समय अमित खन्ना ही कार चला रहा था।
निधि की गवाही पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने गौर किया कि उसके बयान में जहां अंजलि के शराब के नशे में होने की बात कही गई थी, वहीं यह भी कहा गया था कि खन्ना और कार में मौजूद अन्य यात्री भी काफी नशे में थे।
आरोपों की प्रकृति और सीसीटीवी सामग्री को देखते हुए हाईकोर्ट ने खन्ना को जमानत देने से इनकार करते हुए उसकी अर्जी खारिज कर दी।
2023 में हत्या का आरोप तय करने का दिया गया था आदेश
अंजलि सिंह की मौत उस समय हुई थी जब उनकी स्कूटी को कार ने टक्कर मार दी और वह वाहन के नीचे फंसने के बाद सुल्तानपुर से कंझावला की ओर कई किलोमीटर तक घसीटी गईं।
दिल्ली पुलिस ने अप्रैल 2023 में मामले में 800 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद जुलाई 2023 में ट्रायल कोर्ट ने अमित खन्ना और तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या का आरोप तय करने का आदेश दिया था।

