विवादित भाषण मामला: एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर को कलकत्ता हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत, अदालत ने कहा- देश की संप्रभुता को खतरे का मामला पहली नजर में नहीं बनता

कलकत्ता हाईकोर्ट ने आम जन उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख हुमायूं कबीर को मुर्शिदाबाद जिले में दिए गए एक भाषण से जुड़े आपराधिक मामलों में गुरुवार को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के आवश्यक तत्व पहली नजर में भी साबित नहीं होते।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि इस प्रकरण में नेता को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि कबीर द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की कोई आशंका नहीं है, क्योंकि जांच अधिकारी भाषण की इलेक्ट्रॉनिक क्लिपिंग पहले ही जब्त कर चुके हैं।

बीएनएस की धारा 152 के तहत प्रथम दृष्टया आधार नहीं

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीएनएस की धारा 152 को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी आधार रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं हैं।

कबीर के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ बीएनएस की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें धारा 152 भी शामिल है, जबकि इस धारा के बुनियादी तत्व पूरे ही नहीं होते। बचाव पक्ष ने तर्क रखा कि धारा 152 को छोड़कर मामले में लगाई गई अन्य सभी धाराओं में अधिकतम पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, वकील ने अदालत को बताया कि कबीर ने जांच अधिकारी द्वारा जारी नोटिसों का पालन किया है और वे दो बार पूछताछ में भी शामिल हो चुके हैं। इसके आधार पर उन्होंने अदालत की किसी भी शर्त पर अग्रिम जमानत देने का अनुरोध किया।

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राज्य सरकार ने किया अग्रिम जमानत का विरोध

दूसरी तरफ, राज्य सरकार के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि कबीर ने जनसभा को संबोधित करते हुए एक राजनीतिक दल और लोक सेवकों के खिलाफ धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया था। राज्य की ओर से कहा गया कि यदि राजनेता को अग्रिम जमानत दी जाती है, तो इससे आम जनता के साथ-साथ देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

यह कानूनी विवाद कबीर द्वारा जून में मुर्शिदाबाद जिले में एक जनसभा के दौरान दिए गए भाषण से शुरू हुआ था। इसके बाद उनके खिलाफ जिले के शक्तिपुर और रेजीनगर थानों में एफआईआर दर्ज की गई थीं।

राजनीतिक सफर और आगामी उपचुनाव

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हुमायूं कबीर ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निलंबित होने के बाद पिछले साल दिसंबर में एजेयूपी का गठन किया था। इससे पहले वह मुर्शिदाबाद के भरतपुर से टीएमसी के विधायक थे।

इसके बाद हुए अप्रैल के विधानसभा चुनाव में कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों—नौदा और रेजीनगर—से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत दर्ज की। बाद में उन्होंने रेजीनगर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया, जहां अब 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना तय है।

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