पटना हाईकोर्ट ने शराब जब्ती के एक मामले में आरोपी को राहत देते हुए इस अनूठी शर्त पर अग्रिम जमानत मंजूर की है कि वह मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट परिसर के लिए गमले खरीदने हेतु 15,000 रुपये का योगदान देगा। अदालत ने यह फैसला इस आधार पर सुनाया कि बरामद शराब आरोपी के सीधे या सचेत कब्जे से नहीं मिली थी।
जस्टिस राजीव रॉय की एकल पीठ ने सीवान जिले के गोरेयाकोठी थाने में दर्ज प्राथमिकी के सिलसिले में आरोपी प्रवीण आनंद की अग्रिम जमानत याचिका पर 8 सितंबर को सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। हाईकोर्ट ने आनंद को निर्देश दिया कि वह 15,000 रुपये की यह राशि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की स्थानीय शाखा से डिमांड ड्राफ्ट बनवाकर मुजफ्फरपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के पास जमा कराएं।
वकील की पेशकश और हाईकोर्ट की अनूठी शर्त
जमानत के साथ जुड़ी यह वित्तीय शर्त सुनवाई के दौरान आनंद के वकील द्वारा रखे गए एक प्रस्ताव के बाद सामने आई। बचाव पक्ष के वकील ने पीठ को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता स्थानीय मुजफ्फरपुर न्यायमंडल के सिविल कोर्ट परिसर की सुंदरता बढ़ाने के लिए गमले खरीदने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार को 15,000 रुपये की धनराशि देने को तैयार है।
हाईकोर्ट ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए इसे अग्रिम जमानत के आदेश का अनिवार्य हिस्सा बना दिया। आदेश के अनुसार, आदेश की प्रति प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर आनंद को संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। इसके बाद उन्हें 10,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों के आधार पर रिहा किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों जमानतदारों में से एक का उनका पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार होना अनिवार्य है, जिनकी पहचान आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे वैध सरकारी दस्तावेजों के जरिए सत्यापित की जाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी दलीलें
अभियोजन का यह मामला 22 फरवरी की एक घटना से जुड़ा है, जब सीवान जिले की गोरेयाकोठी थाना पुलिस ने एक कार को रोककर उसकी तलाशी ली थी। उस वाहन से पुलिस ने 112.320 लीटर विदेशी शराब (व्हिस्की) बरामद की थी। इसके बाद पुलिस ने बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद संशोधन अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
सुनवाई के दौरान आनंद के वकील ने पटना हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ द्वारा शराबबंदी कानून के तहत अग्रिम जमानत को लेकर दिए गए एक पूर्व फैसले का हवाला दिया। उस नजीर में यह स्पष्ट किया गया था कि यदि प्राथमिकी में दर्ज आरोपों से प्रथम दृष्टया संबंधित अपराध साबित नहीं होता है, तो कानून में मौजूद रोक के बावजूद अदालत अग्रिम जमानत याचिका पर विचार कर सकती है। इस न्यायिक सिद्धांत और अभियोजन के इस तथ्य को स्वीकार करने के बाद कि आनंद के प्रत्यक्ष कब्जे से कोई शराब बरामद नहीं हुई थी, अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से पूर्व संरक्षण देने का फैसला सुनाया।
थाने में नियमित हाजिरी और आचरण के कड़े नियम
अग्रिम जमानत देने के साथ ही पीठ ने मामले की जांच और आगामी सुनवाई में आनंद की निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए निगरानी की बेहद सख्त शर्तें भी तय की हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि जेल से रिहाई के पहले महीने में आनंद को रोजाना स्थानीय थाने में उपस्थित होकर अपनी हाजिरी दर्ज करानी होगी। इसके बाद अगले छह महीनों तक उन्हें हर 15 दिन (पाक्षिक रूप से) थाने जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
सात महीने की यह अवधि समाप्त होने पर निचली अदालत में इस हाजिरी का अनुपालन प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट ने आगाह किया कि यदि आनंद बिना किसी वैध कारण के थाने में हाजिरी दर्ज कराने में विफल रहते हैं, तो अभियोजन पक्ष को उनकी जमानत रद्द कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।
इसके अलावा आनंद को निचली अदालत में मुकदमे की प्रत्येक तारीख पर मौजूद रहना होगा। बिना किसी ठोस वजह के लगातार दो तारीखों पर गैरहाजिर रहने की स्थिति में उनकी जमानत निरस्त की जा सकती है। अदालत ने उन्हें गवाहों को प्रभावित करने, धमकाने या प्रलोभन देने और सबूतों से छेड़छाड़ करने से भी पूरी तरह प्रतिबंधित किया है। साथ ही उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार के आपराधिक कृत्य से दूर रहने की ताकीद की गई है और स्पष्ट किया गया है कि किसी भी नए मामले में शामिल पाए जाने पर उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी।

