मणिपुर में 2009 के तिहरे हत्याकांड मामले में एनएससीएन-आईएम के होपसन निंगशेन को सुप्रीम कोर्ट से राहत, उम्रकैद की सजा पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के उखरुल जिले में फरवरी 2009 में तीन सरकारी अधिकारियों के अपहरण और उनकी हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इसाक मुइवा (NSCN-IM) के स्वयंभू ‘लेफ्टिनेंट’ होपसन निंगशेन की सजा पर सोमवार को रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने निंगशेन की लंबी जेल अवधि को आधार बनाते हुए यह राहत प्रदान की।

जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए रेखांकित किया कि अपीलकर्ता निंगशेन पिछले 17 वर्षों से अधिक समय से जेल में बंद है। पीठ ने कहा कि यह ऐसा मामला है जहां दोषी 17 साल से ज्यादा समय जेल में काट चुका है और उसने केवल सजा निलंबन की मांग की है, खासकर तब जब उसकी मुख्य अपील सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है।

दिल्ली की सीमा में रहने की सख्त शर्त

अदालत ने निंगशेन की सजा निलंबित करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि वह अपील का अंतिम निपटारा होने तक दिल्ली की सीमाओं के भीतर ही रहेगा और राष्ट्रीय राजधानी छोड़कर बाहर नहीं जाएगा। मणिपुर सरकार की ओर से पेश वकील ने निंगशेन की इस याचिका का अदालत में विरोध किया।

ट्रायल कोर्ट की सजा और हाईकोर्ट की मुहर

READ ALSO  बिजली बिल के टैरिफ को रूप देने पर हाई कोर्ट की रोक

इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 नवंबर 2019 को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए निंगशेन की उम्रकैद की सजा कायम रखी थी। दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2014 में निंगशेन को कासोम खुलन के एसडीओ डॉ. थिंगनाम किशन सिंह और उनके दो सहयोगियों के अपहरण और एनएससीएन-आईएम के अन्य उग्रवादियों के साथ मिलकर हत्या करने की आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया था। इसके अतिरिक्त, पीड़ितों का सामान लूटने के आरोप में अदालत ने उस पर 35,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

सुरक्षा कारणों से दिल्ली स्थानांतरित हुआ था मुकदमा

READ ALSO  राजस्थान हाईकोर्ट ने चल रही जांच के बीच सब-इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया रोकी

यह मामला मूल रूप से मणिपुर का था, जिसे मई 2010 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली स्थानांतरित किया गया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत को बताया था कि यदि निंगशेन को मणिपुर की अदालत में पेश किया गया तो उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है और राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल आशंका है। इसी आशंका को देखते हुए शीर्ष अदालत ने मुकदमे की सुनवाई दिल्ली ट्रांसफर करने का निर्देश दिया था।

कासोम खुलन में अपहरण और अधिकारियों की हत्या

सीबीआई के अनुसार, घटना 13 फरवरी 2009 की है जब उखरुल जिले के कासोम खुलन में तैनात एसडीओ-सह-बीडीओ डॉ. थिंगनाम किशन सिंह और उनके पांच कर्मचारियों को निंगशेन और अन्य एनएससीएन-आईएम उग्रवादियों ने अगवा कर लिया था।

अगले ही दिन, उग्रवादियों ने बंधक बनाए गए छह लोगों में से तीन कर्मचारियों—राम सिंह सिरो, रामथिंग सिंगलाई और कपांगखुई जाजो को रिहा कर दिया, क्योंकि वे नागा समुदाय से थे। वहीं, डॉ. किशन सिंह, वाई. टोकन सिंह और ए. राजन शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई। बाद में तीनों के शव मणिपुर के सेनापति के पास तफाओ कुकी नदी के किनारे से बरामद किए गए थे।

READ ALSO  यूपी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को बेटी की शादी के लिए मिली एक हफ्ते की जमानत

जातीय तनाव और सीबीआई को जांच

अधिकारियों की नृशंस हत्या की इस घटना के बाद मणिपुर में मैतेई और नागा समुदायों के बीच भारी तनाव फैल गया था और समूचे राज्य में सिलसिलेवार बंद और विरोध प्रदर्शन हुए थे। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए मणिपुर सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी, जिसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने 29 मई 2009 को होपसन निंगशेन को गिरफ्तार किया था।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles