दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) टेंडर में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) के मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन को गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी। राउज एवेन्यू कोर्ट ने यह राहत उस समय दी जब जैन को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश किया गया। वहीं, विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह की अदालत ने मामले के अन्य सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 17 सितंबर तक बढ़ा दी है।
हिरासत में होने का तर्क और साक्ष्यों का अभाव
अदालत में सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने तर्क दिया कि संबंधित टेंडर अक्टूबर 2022 में जारी किए गए थे, जबकि उस समय जैन किसी अन्य मामले के सिलसिले में पहले से ही जेल में बंद थे। बचाव पक्ष ने दलील दी कि टेंडर प्रक्रिया से जैन का कोई सीधा संबंध जोड़ने वाला साक्ष्य मौजूद नहीं है। इसके साथ ही अदालत को बताया गया कि जांच एजेंसी इस मामले से जुड़े सभी जरूरी साक्ष्य जुटा चुकी है, इसलिए अब उन्हें आगे हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।
लागत बढ़ाने और क्षमता में फेरबदल के आरोप
एसीबी के अनुसार, रोहिणी एसटीपी की क्षमता बढ़ाने संबंधी तकनीकी प्रस्ताव में बिना किसी तकनीकी सिफारिश या व्यवहार्यता अध्ययन (फीजिबिलिटी स्टडी) के मनमाना बदलाव किया गया था। आरोप है कि संयंत्र की क्षमता को बिना किसी उचित प्रक्रिया के 15 एमजीडी से बढ़ाकर सीधे 30 एमजीडी कर दिया गया। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया के तहत रोहिणी और नरेला एसटीपी को शामिल करने तथा ओखला फेज-5 को बाहर करने की वजह से परियोजना की लागत में करीब 123 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा।
कमीशनखोरी और नियमों में ढील का दावा
जांच एजेंसी ने आगे आरोप लगाया कि दिसंबर 2022 में हुई कुछ बैठकों के दौरान दो प्रतिशत कमीशन का सौदा तय किया गया था। इस सांठगांठ में नागेंद्र यादव नाम के एक बिचौलिए ने दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों और यूरोटेक कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत करवाई। इसके अलावा, एसीबी ने आरोप लगाया कि टेंडर दस्तावेजों में सीपीसीबी के अनिवार्य पर्यावरणीय मानकों में जानबूझकर ढील दी गई, ताकि तकनीक प्रदाता कंपनी को अनुचित फायदा पहुंचाया जा सके।

