हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मनाली में युवतियों को नौकरी का झांसा देकर देह व्यापार में धकेलने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आर्थिक लाभ के लिए किसी व्यक्ति को वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेलना मानवता का सबसे निकृष्ट पतन है और यह मानव शरीर को महज एक वस्तु बनाने जैसा है।
जस्टिस राकेश कैंथला ने 19 अगस्त को पारित अपने आदेश में कहा कि ऐसे संगीन मामलों में आरोपी को राहत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा और अन्य अपराधियों को बढ़ावा मिलेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निष्पक्ष जांच और मुकदमे की प्रक्रिया सुरक्षित रखने के लिए आरोपी को हिरासत में रखना जरूरी है, क्योंकि रिहा होने पर पीड़िताओं के लिए बिना किसी डर के निष्पक्ष गवाही देना संभव नहीं होगा।
सहमति और उम्र के अंतर पर कोर्ट की दो टूक
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के इस तर्क को हाईकोर्ट ने सिरे से नकार दिया कि पीड़िताएं बालिग थीं और अपनी मर्जी से काम कर रही थीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि प्रलोभन या बहकावे के आधार पर सहमति ली गई हो, तब भी कानूनन अपराध ही माना जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आरोपी और पीड़िताओं के बीच उम्र का बड़ा फासला होने से बहलाने-फुसलाने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
पीठ ने इस बात को भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 143(3) के तहत गंभीर आरोप हैं, जिसमें अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, आरोपी अदालत में चार्जशीट की प्रति पेश करने में असमर्थ रहा, जिससे अभियोजन पक्ष की ओर से किसी भी तरह की अनावश्यक देरी का दावा साबित नहीं हुआ।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
यह मामला मनाली पुलिस स्टेशन में दर्ज उस एफआईआर से संबंधित है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143 व 143(3) (मानव तस्करी) और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 व 5 (देह व्यापार की कमाई पर जीवन यापन करना और वेश्यावृत्ति के लिए प्रेरित करना) के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं।
आरोपी की ओर से पेश वकील आंचल शर्मा ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है और इस कथित गिरोह से उसे सीधे तौर पर जोड़ने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी और पीड़िताओं की उम्र में बड़ा अंतर होने के कारण उन्हें बरगलाने का आरोप निराधार है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए उप महाधिवक्ता (डिप्टी एडवोकेट जनरल) प्रशांत सेन ने कहा कि आरोपी युवतियों को घरेलू कामकाज का झूठा भरोसा देकर मनाली लाया था और बाद में उन्हें देह व्यापार के लिए विवश कर दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी के पास से पुलिस के चिन्हित नोट बरामद हुए हैं, जिससे यह साफ होता है कि वह इस अवैध कारोबार की कमाई से ही अपना गुजारा कर रहा था। उन्होंने आशंका जताई कि रिहा होने पर आरोपी दोबारा ऐसे ही अपराध को अंजाम दे सकता है।
आधी रात को पुलिस के स्टिंग से हुआ था भंडाफोड़
यह मामला 22 दिसंबर 2025 की आधी रात को मनाली में चलाए गए एक विशेष पुलिस अभियान का है। मनाली बस स्टैंड और माल रोड के आसपास देह व्यापार की गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस ने दो सादी वर्दी वाले जवानों को फर्जी ग्राहक बनाकर भेजा था।
इन जवानों को 500 रुपये के चिन्हित नोट दिए गए थे और निर्देश था कि सौदा पक्का होते ही वे मिस कॉल देकर अपनी लाइव लोकेशन भेजें। तड़के करीब 1:40 बजे पुलिसकर्मी का सिग्नल मिलते ही टीम ने छापेमारी की।
इस कार्रवाई के दौरान दो पुरुषों को हिरासत में लिया गया और सात महिलाओं को सुरक्षित बचाया गया। बचाई गई महिलाओं ने पूछताछ में खुलासा किया कि उन्हें घरेलू सहायिका का काम दिलाने का लालच देकर लाया गया था और बाद में जबरन देह व्यापार में उतार दिया गया।

