सुप्रीम कोर्ट ने गोवा के अरपोरा स्थित नाइटक्लब अग्निकांड मामले में तीनों आरोपियों की जमानत रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इस हादसे में 25 लोगों की जान चली गई थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने आरोपियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए उन्हें दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई में तेजी लाने को कहा है।
यह आदेश नाइटक्लब का संचालन करने वाले सौरव लूथरा, गौरव लूथरा और उनके कारोबारी साझेदार अजय गुप्ता की याचिकाओं पर आया है।
हाईकोर्ट ने जांच सामग्री की अनदेखी पर रद्द की थी जमानत
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 अगस्त को निचली अदालत द्वारा तीनों आरोपियों को दी गई जमानत को निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ट्रायल कोर्ट ने जांच के दौरान जुटाए गए अहम साक्ष्यों और तथ्यों पर उचित तरीके से विचार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस तर्क पर भी कड़ा ऐतराज जताया था, जिसमें इस अपराध को हत्या या डकैती जैसे अपराधों की तुलना में कम गंभीर माना गया था।
गोवा सरकार की अपील पर पलटा था फैसला
तीनों आरोपी ‘मैसर्स बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अरपोरा एलएलपी’ नाम की पार्टनरशिप फर्म के जरिए नाइटक्लब चलाते थे। इस साल अप्रैल में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए तीनों को सत्र अदालत के सामने दो हफ्ते में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।
25 लोगों की हुई थी मौत, 50 हुए थे घायल
यह भीषण अग्निकांड 6 दिसंबर 2025 को उत्तरी गोवा के अरपोरा स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब में हुआ था। आग की चपेट में आने से 25 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 50 अन्य लोग घायल हो गए थे।

