हाथरस पीड़िता के परिवार को 3 महीने में नोएडा या गाजियाबाद में बसाने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिवार को तीन महीने के भीतर नोएडा या गाजियाबाद में पुनर्वसित करे। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा परिवार को अन्य जिलों का विकल्प देने के निर्णय को खारिज करते हुए पिछले अदालती आदेशों का पालन न करने पर सख्त नाराजगी जताई है।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने सोमवार को राज्य सरकार के 22 फरवरी 2025 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें पीड़ित परिवार को कासगंज, एटा या अलीगढ़ में से किसी एक स्थान पर बसने का विकल्प दिया गया था। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्वास प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार को 26 जुलाई 2022 के अदालती आदेश के अनुसार परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान करनी होगी।

मामले में ढिलाई पर सख्त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को आदेश के कार्यान्वयन से जुड़ा अनुपालन हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी को 30 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ेगा।

सरकारी रवैये पर हाईकोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि राज्य सरकार के 22 फरवरी के फैसले में पीड़ित परिवार द्वारा गाजियाबाद या नोएडा में बसने के लिए किए गए स्पष्ट अनुरोध का उल्लेख तक नहीं किया गया था। अदालत ने माना कि सरकार का यह कदम पिछले न्यायिक निर्देशों के अनुरूप नहीं था।

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पीठ ने टिप्पणी की कि प्रशासन की ओर से इस मामले में अनावश्यक विरोध देखने को मिल रहा है। कोर्ट के अनुसार, सरकार का यह रुख पीड़ित परिवार के उस दावे को बल देता है जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले को एक विरोधी मुकदमेबाजी की तरह ले रही है।

सुरक्षा और रिश्तेदारों की मौजूदगी का तर्क

अदालत में परिजनों का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता महमूद प्राचा ने कहा कि कासगंज, एटा और अलीगढ़ की दूरी हाथरस से काफी कम है, जिससे परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बनी रहती हैं। इसके अलावा, इन जिलों में परिवार का कोई संबंधी नहीं रहता है।

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि गाजियाबाद और नोएडा में पीड़िता के रिश्तेदार रहते हैं। वहां पुनर्वास होने से परिवार के सदस्य बिना किसी डर या भय के सामान्य जीवन व्यतीत कर सकेंगे।

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सितंबर 2020 का मामला

यह कानूनी कार्रवाई सितंबर 2020 की उस घटना से जुड़ी है, जिसमें हाथरस के एक गांव में 19 वर्षीय युवती के साथ चार पुरुषों ने कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया था। गंभीर रूप से घायल युवती की घटना के दो सप्ताह बाद दिल्ली के एक अस्पताल में मृत्यु हो गई थी।

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