सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को दोबारा खोलने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली से असंतुष्ट छात्रों की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आवेदन की खिड़की सभी उम्मीदवारों के लिए एक निश्चित समय के लिए खोली गई थी।
समय सीमा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि तय समय बीत जाने के बाद पोर्टल को फिर से खोलने से नए दावों की बाढ़ आ जाएगी।
बस छूटने का उदाहरण देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि आप समय पर बस में नहीं चढ़ते, तो आपकी बस छूट जाती है। उन्होंने कहा कि आवेदन का अवसर सभी के लिए एक समान अवधि तक उपलब्ध था, इसलिए इसमें कोई ढील नहीं दी जा सकती।
डिजिटल मूल्यांकन और तकनीकी खामियों पर याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से केवल एक सप्ताह का अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि अंतिम दिनों में सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट क्रैश हो गई थी, जिसके कारण कई छात्र ऑन-स्क्रीन सत्यापन के लिए समय पर आवेदन नहीं कर पाए।
याचिका में सीबीएसई द्वारा लागू ओएसएम प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे। इस प्रणाली के तहत शिक्षक कागजी उत्तर पुस्तिकाओं की कंप्यूटर स्क्रीन पर स्कैन की गई डिजिटल कॉपियों की जांच करते हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्कैनिंग की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं हुईं, जिनमें पन्नों का स्कैन न होना, धुंधली तस्वीरें और कई उत्तरों का मूल्यांकन छूटना शामिल है।
सीबीएसई की दलील और दिल्ली हाईकोर्ट का हवाला
सीबीएसई का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि आधिकारिक तौर पर अधिसूचित समय सीमा के भीतर 1.68 लाख अभ्यर्थियों ने सफलतापूर्वक अपने आवेदन जमा किए हैं।
इसके अलावा, सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को यह भी बताया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को चुनौती देने वाली इसी तरह की एक याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।

