तेलंगाना हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म करने और एक महिला सहकर्मी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी दो वकीलों को अग्रिम जमानत दे दी है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एन. तुकारामजी की पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल बहस, अपमान या अप्रिय शब्द कहना तब तक आत्महत्या का उकसावा नहीं माना जा सकता, जब तक कि इसके पीछे सीधा इरादतन उकसावा या घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो। हाईकोर्ट ने माना कि इस मामले में आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता नहीं है।
जमानत की शर्तें और कोर्ट के निर्देश
21 अगस्त को जारी अपने आदेश में हाईकोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को गवाहों को डराने-धमकाने, प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ न करने का सख्त निर्देश दिया। इसके साथ ही, अदालत ने दोनों वकीलों को अपना पूरा आवासीय पता और मोबाइल नंबर जांच अधिकारी को सौंपने तथा संपर्क विवरण में कोई भी बदलाव होने पर तुरंत सूचित करने का आदेश दिया।
पीड़िता के आरोप और घटनाक्रम
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, शिकायतकर्ता तलाकशुदा महिला वकील 2021 में एक लॉ फर्म में जूनियर एडवोकेट के रूप में शामिल हुई थी, जहां उसकी मुलाकात मुख्य आरोपी से हुई जो वहां भी जूनियर वकील था। महिला का आरोप है कि मार्च 2023 में आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी का झांसा देकर लगभग दो साल तक शारीरिक संबंध बनाए रखे।
महिला के अनुसार, आरोपी उसे अपने परिवार से भावी पत्नी के रूप में मिलवाकर उसके साथ लिव-इन में रहा, लेकिन इस दौरान उसने महिला पर नियंत्रण रखा, मारपीट की और जबरन आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां खिलवाईं।
महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी बाद में शादी के वादे से मुकर गया और उसकी वैवाहिक स्थिति व बच्चे को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं। आरोपी उसे अन्य विवाह प्रस्तावों पर आगे बढ़ने से भी रोकता रहा। लगातार हो रही प्रताड़ना से तंग आकर पीड़िता ने 24 मई और 8 जुलाई को आत्महत्या का प्रयास किया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 13 जुलाई को स्थानीय बार एसोसिएशन के समक्ष हुई मध्यस्थता और पुलिस स्टेशन की कार्यवाही के दौरान मुख्य आरोपी और सह-आरोपी वकील दोनों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। महिला द्वारा 24 जुलाई को दी गई औपचारिक शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
बचाव पक्ष के तर्क और कोर्ट की टिप्पणी
अदालत में याचिकाकर्ताओं ने आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद और बाद में गढ़ा हुआ बताया। मुख्य आरोपी ने कहा कि 2023 से दोनों के बीच सहमति से लिव-इन संबंध थे। उसने अपने पक्ष में लगभग 10 लाख रुपये के वित्तीय लेन-देन, व्हाट्सएप मैसेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग और तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि इन साक्ष्यों की जांच ट्रायल के दौरान होनी चाहिए। वहीं, दूसरे वकील के खिलाफ लगे आरोपों को केवल मध्यस्थता के दौरान हुई कहासुनी तक सीमित बताया गया। दोनों वकीलों ने तर्क दिया कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और गिरफ्तारी से उनके पेशेवर करियर को नुकसान पहुंचेगा।
राज्य सरकार और पीड़िता के वकील ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त प्राथमिक साक्ष्य मौजूद हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला करते समय साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन या मामले के गुण-दोष पर अंतिम निष्कर्ष देना जरूरी नहीं होता है।

