जज के साथ अभद्रता और धमकी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना के आरोप तय किए

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने जिला जज के समक्ष सुनवाई के दौरान अनुचित भाषा का इस्तेमाल करने, धमकियां देने और अदालत के प्राधिकार को ठेस पहुंचाने के मामले में एक प्रैक्टिसिंग वकील के खिलाफ अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12 के तहत दंडनीय धारा 2(सी) के तहत आपराधिक अवमानना के आरोप तय किए हैं। अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने पर जब वकील को आरोप पढ़कर सुनाए और समझाए गए, तो उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए ट्रायल का सामना करने की बात कही।

मामले की पृष्ठभूमि

यह अवमानना कार्रवाई तीस हजारी कोर्ट, दिल्ली के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट स्थित कमर्शियल कोर्ट-13 के जिला जज एम. के. नागपाल द्वारा भेजे गए दो अलग-अलग संदर्भों (रेफरेंस) के आधार पर शुरू हुई है।

पहले मामले, कंटेंप्ट केस (क्रिमिनल) 7/2025 में, संदर्भ 3 अप्रैल 2025 को अंकित सारड़ा बनाम ईटीए इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड (मिसलेनियस डीजे नंबर 282/2025) में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 151 के तहत दायर आवेदन की सुनवाई से जुड़ा है। आरोप के अनुसार, वकील ने ऊंची आवाज में बात की, अदालत पर पक्षपात का आरोप लगाया, न्यायिक अधिकारियों पर मनमाने और खिलाफ में आदेश पारित करने का आरोप लगाया और अवमानना कार्रवाई शुरू किए जाने पर जवाबी शिकायत दर्ज कराने की धमकी दी।

दूसरे मामले, कंटेंप्ट केस (क्रिमिनल) 9/2025 में, 23 अप्रैल 2025 के संदर्भ के आधार पर घटना 16 अप्रैल 2025 को मोहम्मद आजम खान बनाम जुल्फिकार अहमद (सीएस (कॉम) नंबर 25/2025) में वर्चुअल सुनवाई के दौरान हुई। कॉज लिस्ट में गलत तारीख दर्ज होने के संबंध में पूछताछ करते समय वकील ने कथित तौर पर बदतमीजी की, असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया और अदालत से लिखित माफी की मांग की, जबकि जज ने आश्वासन दिया था कि इसके लिए जिम्मेदार स्टाफ सदस्य को तलब किया जाएगा।

अदालत का विश्लेषण और मुख्य टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि खुली अदालत में और वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए उपस्थित लोगों के सामने किए गए इन कृत्यों ने अदालत के प्राधिकार को कम किया और न्यायिक कार्यवाही के सुचारू संचालन एवं न्याय प्रशासन में बाधा डालने का प्रयास किया।

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कंटेंप्ट केस (क्रिमिनल) 7/2025 में तय किए गए आरोप में बेंच ने खुली अदालत में वकील द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा का विवरण दर्ज किया:

“मैं आपसे डर के… और जो आपको लिखना है आप लिख दीजिए, मैं वो वकील नहीं हूं जो जी जनाब जी हुजूर करूं। मैं अपने अधिकारों के साथ खड़ा हूं और इसे या तो आपसे लूंगा या दिल्ली हाईकोर्ट से और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट से। और अब यह केस का विवाद नहीं है, अब यह आपके और मेरे बीच का विवाद है और मैं आपको चुनौती भी देता हूं… आपको जहां जाना है जाएं, जो करना है करिए और मैं आपको नहीं छोडूंगा, चाहे इसके पीछे मेरे 10 लाख रुपये ही क्यों न खर्च हो जाएं।”

वकील ने जज से आगे कहा:

“आपको सैलरी मिलती है आप मेरे ऊपर कोई अहसान नहीं कर रहे, मेरे टैक्स से आपकी सैलरी जाती है, मैं 30% के स्लैब में आता हूं, मैं सैलरी दे रहा हूं आपको… आप यहां बैठ के दादागिरी करेंगे क्या, आपकी बात सुनते रहें यहां बैठ के, आप कहें.. यस सर, मैं आपका नौकर हूं क्या।”

कंटेंप्ट केस (क्रिमिनल) 9/2025 में, क्लर्क द्वारा तारीख दर्ज करने की गलती पर बहस के दौरान वकील ने कथित तौर पर कहा:

“वो सर ठीक होता अगर आप डिजर्व करते तो, डिजर्व ही नहीं करते रिस्पेक्ट सर….”

जब जज ने अनुचित शब्दों के इस्तेमाल पर चेतावनी दी, तो वकील ने कहा:

“सर वो तो मैं, आप कैसे भी लीजिए, उससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, आपने आज गलती की है, उसके लिए सॉरी बोलिए। क्योंकि प्रिसाइडिंग ऑफिसर गलती के लिए जिम्मेदार है।”

अदालत का निर्णय

हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(सी) सहपठित धारा 12 के तहत औपचारिक रूप से आरोप तय किए। आरोपी वकील ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया और सुनवाई की मांग की।

कंटेंप्ट केस (क्रिमिनल) 7/2025 में हाईकोर्ट ने सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के प्रिंसिपल्स डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज को 3 अप्रैल 2025 की अदालती कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त कर भेजने का निर्देश दिया। कंटेंप्ट केस (क्रिमिनल) 9/2025 में अदालत ने अवमाननाकर्ता को रजिस्ट्री से संपर्क कर संदर्भ की पूरी प्रति और संलग्न ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त करने की अनुमति दी।

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हाईकोर्ट ने वकील को आरोपों पर अपना लिखित जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है और अगली सुनवाई की तारीख 15 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

मामले का विवरण

मामले का शीर्षक: कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम राकेश कुमार, एडवोकेट
वाद संख्या: कंटेंप्ट केस (क्रिमिनल) 7/2025 और कंटेंप्ट केस (क्रिमिनल) 9/2025
पीठ: जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा
निर्णय की तिथि: 20 अगस्त 2026

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