राजस्थान हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर जिले में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए आवासीय संपत्तियों को ढहाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने स्थानीय प्रशासन को प्रभावित निवासियों की आपत्तियों पर विचार करने के लिए अधिकारियों की समिति बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए निर्माण के दौरान काटे जाने वाले प्रत्येक पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाने का निर्देश जारी किया है।
संपत्ति विवाद और मास्टर प्लान का क्रियान्वयन
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने 19 अगस्त को याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। श्रीगंगानगर के नगर विकास न्यास (यूआईटी) ने शहर के 1981-2001 के मास्टर प्लान के तहत यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए 80 फीट चौड़े मार्ग से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। न्यास ने संपत्ति धारकों को बेदखली के नोटिस जारी करते हुए तर्क दिया था कि यह भूमि यूआईटी की है और केवल बिक्री समझौते (एग्रीमेंट टू सेल) के आधार पर किसी को मालिकाना हक नहीं मिल जाता।
दूसरी ओर, प्रभावित निवासियों का कहना था कि बेदखली के नोटिस जारी करने से पहले उनकी आपत्तियों और दावों पर कोई विचार नहीं किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज भंडारी, अधिवक्ता श्रेयांश भंडारी और सलोनी जैन के माध्यम से अदालत पहुंचे याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे कानूनी रूप से इन संपत्तियों पर काबिज हैं। बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और मुआवजा दिए बिना उन्हें बेदखल नहीं किया जा सकता।
सुनवाई और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राजस्थान नगर सुधार अधिनियम, 1959 के तहत शहरी निकायों को जनहित में मास्टर प्लान लागू करने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन इस प्रक्रिया में संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि उचित नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उन पर निर्णय लिए बिना सीधे बेदखली के नोटिस जारी कर दिए गए। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की एक समिति गठित करने का निर्देश दिया, जो प्रभावित भू-स्वामियों के दावों और आपत्तियों का परीक्षण कर नियमानुसार निर्णय लेगी।
पर्यावरण संरक्षण के लिए 10 गुना पौधरोपण के निर्देश
सड़क निर्माण के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि नगर निकाय हटाए जाने वाले सभी पेड़ों और पौधों का पूरा ब्योरा दर्ज करेंगे। इसके बाद, काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में 10 गुना पौधे रोपे जाएंगे ताकि भावी पीढ़ियों को स्वच्छ और ऑक्सीजन युक्त वातावरण मिल सके। अदालत ने कहा कि दशक या शताब्दी पुराने पेड़ शहर और समाज को निरंतर लाभ पहुंचाते हैं, इसलिए जनहित में इनका संरक्षण और क्षतिपूर्ति पौधरोपण अत्यंत आवश्यक है।

