भारी बारिश और बिजली-इंटरनेट ठप होने के कारण दस्तावेज सत्यापन की निर्धारित समय सीमा से चूकी एक नीट-यूजी 2026 अभ्यर्थी को गुवाहाटी हाईकोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने असम के चिकित्सा शिक्षा निदेशक (डीएमई) को निर्देश दिया है कि वे सेवारत व पूर्व रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित कोटे के तहत एमबीबीएस प्रवेश हेतु उम्मीदवार के अभ्यावेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।
19 अगस्त तक भौतिक रूप से आवेदन सौंपने की छूट
जस्टिस एन उन्नी कृष्णन नायर ने 18 अगस्त को यह आदेश जारी करते हुए अभ्यर्थी को 19 अगस्त सुबह 11 बजे तक डीएमई के समक्ष अपना नया अभ्यावेदन भौतिक रूप से जमा करने की अनुमति दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया से पहले से शॉर्टलिस्ट किए गए किसी भी उम्मीदवार के चयन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए और न ही पूरी प्रवेश प्रक्रिया बाधित होनी चाहिए। प्राधिकरण को अपना निर्णय छात्रा द्वारा उपलब्ध कराए गए ईमेल या फोन नंबर के माध्यम से सूचित करने का निर्देश दिया गया है।
बारिश और बिजली कटौती के कारण छूटी थी डेडलाइन
याचिकाकर्ता के पिता भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। राजस्थान के कोटा से परीक्षा की तैयारी करने वाली इस छात्रा ने नीट-यूजी 2026 में सफलता प्राप्त कर असम की अनंतिम राज्य मेधा सूची में स्थान बनाया था। इसके बाद उसने रक्षा कर्मी कोटा के तहत एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए आवेदन किया था।
राज्य प्राधिकारियों ने 10 अगस्त को एक शैक्षणिक अधिसूचना जारी कर विशेष आरक्षित श्रेणियों के अभ्यर्थियों को ऑफ़लाइन दस्तावेज सत्यापन के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित तिथि पर उपस्थित न होने पर संबंधित कोटे का दावा निरस्त मान लिया जाएगा। छात्रा के अनुसार, 10 से 13 अगस्त के बीच उसके सुदूर ग्रामीण गांव में भारी बारिश के कारण बिजली और मोबाइल कनेक्टिविटी पूरी तरह बंद हो गई थी, जिससे वह नोटिस नहीं देख पाई और 12 अगस्त की सत्यापन तिथि से चूक गई।
कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान छात्रा के वरिष्ठ वकील ए आर भुइयां ने एक समान मामले का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने परिस्थितियों को देखते हुए अभ्यर्थी को डीएमई के समक्ष अभ्यावेदन देने की अनुमति दी थी। उन्होंने अपनी मुवक्किल के लिए भी वैसी ही राहत मांगी।
दूसरी ओर, राज्य सरकार के स्थायी वकील डी पी बोराह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अन्य सभी दावेदारों ने बिना किसी आपत्ति के समय सीमा का पालन किया है। बोराह ने तर्क दिया कि शुरुआती सत्यापन प्रक्रिया में सैनिक बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल थे और उपयुक्त उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित की जा चुकी है, इसलिए सत्यापन प्रक्रिया को दोबारा खोलना व्यावहारिक नहीं होगा।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अवलोकन किया कि एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया एक सुव्यवस्थित ढांचे के तहत चल रही है और इस स्तर पर सीधे कोटा स्वीकार करने का निर्देश देने से प्रशासनिक समय-सारणी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, छात्रा की मानवीय कठिनाई को देखते हुए कोर्ट ने उसे अपनी बात सीधे डीएमई के समक्ष रखने का अवसर प्रदान किया।

