गुमशुदा बच्चों की पहचान के लिए राष्ट्रीय डीएनए और बायोमेट्रिक ढांचा बनाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और NCPCR से मांगा जवाब

देश में गुमशुदा और बचाए गए बच्चों की वैज्ञानिक पहचान और उनके परिवारों से पुनर्मिलन के लिए एक केंद्रीय डीएनए और बायोमेट्रिक डेटाबेस स्थापित करने की मांग उठी है। इस संबंध में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को नोटिस जारी कर उनका रुख स्पष्ट करने को कहा है।

याचिका में केंद्रीय तंत्र और वैज्ञानिक मिलान की सिफारिश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता रीपक कंसल की ओर से अधिवक्ता प्रवीर चौधरी के माध्यम से दायर जनहित याचिका पर यह निर्देश जारी किया। याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कानूनी सुरक्षा उपायों से युक्त एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय प्रणाली बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिससे रेस्क्यू किए गए और लापता बच्चों का सटीक वैज्ञानिक मिलान हो सके।

याचिका के अनुसार, सभी अज्ञात रेस्क्यू बच्चों तथा अपने लापता बच्चों को खोजने की इच्छा रखने वाले जैविक माता-पिता या अभिभावकों का अनिवार्य डीएनए सैंपल लिया जाना चाहिए। हालांकि, इसमें सहमति और निजता के कड़े मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

गोद लेने की प्रक्रिया से पहले अनिवार्य डीएनए जांच का प्रस्ताव

READ ALSO  ‘अनुचित, दमनकारी और असंवैधानिक’: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वन कर्मचारियों के लिए बांड की शर्तों को खारिज किया 

बाल तस्करी और अवैध रूप से गोद लेने के मामलों को रोकने के लिए याचिका में प्रस्ताव दिया गया है कि किसी भी बच्चे को गोद देने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले राष्ट्रीय रिकॉर्ड से उसका अनिवार्य डीएनए सत्यापन कराया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस कदम से बच्चे की प्रामाणिक पहचान स्थापित होगी और नाम या पहचान बदलकर किए जाने वाले अवैध कृत्यों पर रोक लगेगी।

इसके अलावा, पुलिस थानों, शेल्टर होम, बाल कल्याण समितियों और मानव तस्करी विरोधी इकाइयों में बिखरे मौजूदा डेटाबेस को आपस में जोड़कर एक रियल-टाइम राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म तैयार करने की मांग की गई है।

READ ALSO  गोद लेने की उम्र सीमा के करीब पहुंचे दंपत्ति को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत, वरिष्ठता बहाल रखने का निर्देश

टास्क फोर्स का गठन और एसओपी तैयार करने का सुझाव

विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, समयबद्ध जांच, रेस्क्यू और पुनर्वास को गति देने के लिए याचिका में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर विशेष बाल संरक्षण व एंटी-ट्रैफिकिंग टास्क फोर्स गठित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, बच्चों की तलाश, जेनेटिक टेस्टिंग, पारिवारिक पुनर्मिलन, वित्तीय सहायता और लंबी अवधि की देखरेख के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अधिसूचित करने की बात कही गई है।

READ ALSO  मित्रता का अर्थ दूसरे व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध संभोग करने का अधिकार नहीं- कोर्ट ने 18 साल के युवक को सुनाई 8 साल की सजा

पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया गया है कि संबंधित प्राधिकरणों को नियमित रूप से अनुपालन हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया जाए। इन रिपोर्टों में लापता बच्चों की संख्या, एकत्रित डीएनए सैंपल, स्थापित हुए मिलान, पुनर्मिलन के मामलों, दर्ज आपराधिक मुकदमों और पुनर्वास के कदमों का विस्तृत विवरण देने का प्रस्ताव है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles