केरल में 100 करोड़ रुपये की लागत से बने दो कोर्ट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन, CJI बोले- ‘छोटे शहरों तक न्याय पहुंचाना प्राथमिकता’

केरल के इरिंजलाकुडा और चावक्कड़ में 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार दो आधुनिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स का मंगलवार शाम वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया गया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्या कांत ने इन अदालती परिसरों का लोकार्पण करते हुए कहा कि न्याय प्रणाली को बड़े महानगरों तक सीमित रखने के बजाय छोटे कस्बों और आम नागरिकों के करीब पहुंचाना बेहद जरूरी है।

मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने की पहल

जिले में मुकदमों की स्थिति पर बात करते हुए चीफ जस्टिस ने बताया कि इस समय लगभग 30 हजार सिविल मामले और एक लाख से अधिक आपराधिक मामले पेंडिंग हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे समाज का विस्तार हो रहा है, अदालतों पर मुकदमों का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

महिलाओं और संवेदनशील मुकदमों के लिए विशेष सुविधाएं

इन परिसरों में आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ संवेदनशीलता का भी ध्यान रखा गया है। CJI ने बताया कि मुकदमों को बिना लंबी अदालती सुनवाई के आपसी सहमति से सुलझाने के लिए समर्पित मध्यस्थता (मीडिएशन) हॉल बनाए गए हैं। इसके अलावा, पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों की गोपनीयता और सम्मान बनाए रखने के लिए फैमिली कोर्ट में अलग काउंसलिंग क्यूबिकल्स की व्यवस्था की गई है।

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कानूनी क्षेत्र में महिला वकीलों की बढ़ती भागीदारी का जिक्र करते हुए कॉम्प्लेक्स में महिला अधिवक्ताओं के लिए एक अलग हॉल आरक्षित किया गया है। चीफ जस्टिस ने कहा कि आधुनिक न्याय प्रणाली में महिलाओं को गरिमापूर्ण और समान पेशेवर माहौल मिलना अनिवार्य है।

पूक्कलम की तर्ज पर समावेशी न्याय व्यवस्था का संदेश

न्याय प्रणाली की तुलना ओणम त्योहार पर बनने वाली पारंपरिक फूलों की रंगोली ‘पूक्कलम’ से करते हुए CJI सूर्या कांत ने कहा कि जिस तरह विभिन्न रंगों और किस्मों के फूल मिलकर एक सुंदर पूक्कलम बनाते हैं, ठीक उसी तरह एक प्रभावी न्याय व्यवस्था को भी पूरी तरह समावेशी होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अदालती प्रक्रिया का लाभ शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज के जनजातीय समुदायों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।

बाढ़ पीड़ितों के प्रति व्यक्त की संवेदना

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केरल के कुछ हिस्सों में आई गंभीर बाढ़ के कारण चीफ जस्टिस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके। उन्होंने इस प्राकृतिक आपदा पर चिंता व्यक्त करते हुए बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की और उनके सुरक्षित रहने व शीघ्र उबरने की कामना की।

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