प्रयागराज शहर में भीषण जलभराव और ‘ड्रैनेज मास्टर प्लान’ तैयार करने से जुड़े 20 दिसंबर 2024 के सरकारी आदेश का पालन न होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नागरिक सुविधाओं के ठप होने से अदालत तक पहुंचने में रुकावट आती है, जो सीधे तौर पर न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप है। भारी बारिश से उत्पन्न संकट पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने जनहित याचिका (पीआईएल) दर्ज कर त्वरित सुनवाई का निर्देश दिया। वहीं जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने स्थानीय वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से तलब किया और राज्य सरकार को स्वीकृत योजनाओं पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
हाल के दिनों में हुई मूसलाधार बारिश के कारण प्रयागराज के बड़े हिस्से में जलभराव हो गया, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। ‘अमर उजाला’ जैसे समाचार पत्रों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया गया कि जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन, अल्लापुर, अलोपीबाग, बैरहना, रामबाग और प्रीतम नगर जैसे प्रमुख आवासीय क्षेत्रों में पानी भर गया है। इन इलाकों के निवासी अपने ही घरों में नजरबंद होने को मजबूर हो गए हैं और सड़कों पर निकलने में असमर्थ हैं। इस अव्यवस्था का असर न्यायिक बुनियादी ढांचे पर भी पड़ा और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फोटो एफिडेविट सेंटर के सामने पानी जमा होने के कारण वकील और वादकारी आपातकालीन मामलों को दाखिल करने के लिए परिसर तक नहीं पहुंच सके।
वकीलों और पक्षों की दलीलें
18 अगस्त 2026 की सुबह 10:00 बजे हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी और अमरेन्द्र नाथ सिंह के नेतृत्व में जस्टिस सिद्धार्थ नंदन के समक्ष शहर की स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लिस्टेड मामलों में पैरवी के लिए वकील और उनके क्लर्क अपने घरों व दफ्तरों से केस फाइलें नहीं ला पा रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक एडवोकेट के क्लर्क साइकिल से कोर्ट आ रहे थे, लेकिन जलभराव और गड्ढों के कारण संतुलन बिगड़ने से वे गिर गए और मुकदमे की फाइलें पानी में भीगकर खराब हो गईं।
अदालत को यह भी बताया गया कि प्रयागराज के नगर आयुक्त और जिलाधिकारी ने इस समस्या को हल करने में असमर्थता जताई है, क्योंकि शहर के ड्रेनेज प्रोजेक्ट्स राज्य सरकार के स्तर पर वित्तीय मंजूरी के लिए लंबित हैं। एम.जी. मार्ग पर ग्रीन बेल्ट के ऊपर कैचमेंट एरिया का प्रस्ताव प्रमुख सचिव (नगर विकास) और मुख्य सचिव स्तर पर मंजूर हो चुका है, लेकिन बजट आवंटन की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय में अटकी हुई है।
इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेन्द्र नाथ सिंह ने जवाहर लाल नेहरू मार्ग और सी.वाई. चिंतामणि मार्ग के चौराहे पर स्थित प्राकृतिक कैचमेंट तालाब पर अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि इस तालाब की जमीन पर ‘संगम पेट्रोल पंप’ संचालित हो रहा है और इसके आसपास निजी व्यक्तियों व नगर निगम द्वारा अतिक्रमण किया गया है, जबकि इस मामले में पूर्व में सीबीआई जांच और सजाएं भी हो चुकी हैं। वहीं सुनवाई के दौरान मौजूद अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि जॉर्ज टाउन और टैगोर टाउन के 3,000 से 4,000 घरों में केवल बारिश का पानी नहीं, बल्कि सीवर का पानी घुस गया है, जिससे महामारी और बीमारियों का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी और विश्लेषण
दलीलों पर विचार करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने टिप्पणी की कि नागरिक प्रशासन की विफलता सीधे तौर पर अदालती कामकाज में बाधा डालती है। अदालत ने कहा:
“यह अदालत इसे एक गंभीर मामला मानती है और यदि वकीलों व उनके क्लर्कों को अदालत आने से रोका जाता है और केस फाइलों का रिकॉर्ड नष्ट हो रहा है, तो यह सीधे तौर पर न्याय प्रशासन को प्रभावित करता है।”
उसी दिन शुरू हुई एक अन्य स्वतः संज्ञान कार्यवाही में खंडपीठ ने रेखांकित किया कि शहर में जलभराव के कारण न्यायाधीशों को भी अदालत पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे अदालती कार्यवाही में देरी हो रही है और न्याय प्रशासन बाधित हो रहा है।
अदालत का फैसला और निर्देश
संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह ‘20.12.2024 के सरकारी आदेश के अनुसार ड्रैनेज मास्टर प्लान तैयार न करने और प्रयागराज शहर में नागरिक सुविधाओं की विफलता’ के विषय पर एक नियमित जनहित याचिका दर्ज करे। रजिस्ट्री को आदेश दिया गया कि इस मामले को मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष तुरंत पीठ के नामांकन और त्वरित सुनवाई के लिए पेश किया जाए।
दूसरी ओर, खंडपीठ ने प्रयागराज के जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का निर्देश देते हुए कहा:
“प्रयागराज के जिलाधिकारी और नगर आयुक्त अदालत के समक्ष पेश होकर स्पष्ट करें कि शहर, विशेष रूप से निचले इलाकों में जलभराव न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए समय रहते अग्रिम कदम क्यों नहीं उठाए गए।”
खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास एवं नियोजन सचिव को दो दिनों के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि शहर को डूबने से बचाने के लिए क्या स्वीकृत योजनाएं हैं। अदालत ने महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्रा और अपर महाधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी को 20 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में सहयोग करने का निर्देश दिया।
मामले का विवरण
मामले का शीर्षक: स्वतः संज्ञान रिट याचिका (इन री: प्रयागराज शहर में जलभराव) / इन री प्रयागराज शहर में जलभराव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, सचिव, नगर विकास एवं नियोजन तथा 2 अन्य के माध्यम से
वाद संख्या: स्वतः संज्ञान याचिका संख्या …… / 2026 / रिट-सी संख्या 33377 / 2026

