कानून के तहत नोटरी पब्लिक के पास मैरिज ऑफिसर (विवाह अधिकारी) के रूप में कार्य करने या ऐसा दस्तावेज निष्पादित करने का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है, जिससे यह गलत धारणा बने कि कोर्ट मैरिज संपन्न हो गई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ, जिसमें जस्टिस जी. एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला शामिल हैं, ने एक नोटरी पब्लिक के खिलाफ शुरू की गई स्वप्रेरणा (सुओ मोटो) कार्यवाही को समाप्त कर दिया। हाईकोर्ट ने नोटरी की बिना शर्त माफी को स्वीकार करते हुए, वकील कल्याण कोष में 2,00,000 रुपये जमा कराने और कार्यस्थल पर एक डिस्प्ले बोर्ड लगाने की शर्त रखी है, जिसमें स्पष्ट लिखा हो कि विवाह संबंधी दस्तावेजों का नोटरीकरण नहीं किया जा सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह स्वप्रेरणा याचिका एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका (W.P. No. 26269/2026) से उपजी है। उस याचिका में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी को उसके पिता ने अवैध हिरासत में रखा हुआ है।
13 जुलाई 2026 को, कथित रूप से बंधक बनाई गई महिला (कॉर्पस) हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुई और उसने बयान दिया कि दोनों पक्ष दतिया जिला अदालत में कोर्ट मैरिज के लिए गए थे। वहां एक वकील ने कुछ कागजों पर उनके हस्ताक्षर लिए और बताया कि अब उनका विवाह संपन्न हो गया है।
केस डायरी का अवलोकन करने पर हाईकोर्ट को एक नोटरीकृत दस्तावेज मिला जिसका शीर्षक “विवाह वाद विवाह के पंजीयन बावत लिखतम” (दिनांक 27 जून 2026) था। यह दस्तावेज दतिया के नोटरी पब्लिक श्री राघवेंद्र समाधिया द्वारा नोटरीकृत किया गया था।
भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय, कानूनी कार्य विभाग (नोटरी सेल) द्वारा 10 अक्टूबर 2024 को जारी कार्यालय ज्ञापन और पूर्व के अदालती फैसलों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक नोटरी मैरिज ऑफिसर के रूप में कार्य नहीं कर सकता और उसे ऐसा कोई दस्तावेज निष्पादित करने का अधिकार नहीं है जिससे लोगों के मन में यह भ्रम पैदा हो कि कोर्ट मैरिज हो गई है। इसके बाद हाईकोर्ट ने श्री समाधिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
पक्षों की दलीलें और अनावेदक का हलफनामा
28 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट के समक्ष पेश होकर श्री समाधिया ने अपनी गलती स्वीकार की और माना कि वे केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन से अवगत थे।
12 अगस्त 2026 को अधिवक्ता श्रीमती चंचल शर्मा के माध्यम से अनावेदक की ओर से एक लिखित जवाब और हलफनामा दायर किया गया। श्री समाधिया ने बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि गलतफहमी के कारण उन्होंने उक्त दस्तावेज को नोटरीकृत किया था। उन्होंने हाईकोर्ट को वचन दिया कि वे भविष्य में ऐसी गलती कभी नहीं दोहराएंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री जितेन्द्र शर्मा, जिनके साथ अधिवक्ता श्री अंकुर माहेश्वरी और श्री सत्य पाल सोलंकी उपस्थित थे, ने हाईकोर्ट से प्रार्थना की कि अनावेदक को यह साबित करने का एक और मौका दिया जाए कि उनका यह आश्वासन सच्चे दिल से है। व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर श्री समाधिया ने कहा कि वे अपनी नेक नीयत साबित करने के लिए वकीलों के कल्याण के लिए 2,00,000 रुपये का योगदान देने को तैयार हैं और अपने कार्यस्थल पर एक बोर्ड लगाएंगे कि विवाह संबंधी शपथ पत्रों का नोटरीकरण कानूनन वर्जित है।
राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता श्री जी.के. अग्रवाल उपस्थित हुए।
हाईकोर्ट का विश्लेषण और प्रमुख टिप्पणियां
प्रस्तुत दलीलों और हलफनामे पर विचार करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की:
“गलती करना कोई पाप नहीं है, लेकिन उसी गलती को दोहराना पाप होगा। पापी से कोई नफरत नहीं होनी चाहिए, बल्कि नफरत पाप से होनी चाहिए। श्री समाधिया ने न केवल आज बल्कि 28.07.2026 को भी अपनी गलती स्वीकार की है। यह स्वीकारोक्ति उनके दिल की गहराई से है या फिर सतही है, इसका फैसला इन कार्यवाहियों में नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका पता उनके भविष्य के आचरण से ही चलेगा।”
कार्यस्थल पर चेतावनी बोर्ड लगाने और बार एसोसिएशन के कल्याण के लिए 2,00,000 रुपये देने की उनकी सहमति को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि उन्हें एक और मौका दिया जा सकता है।
हाईकोर्ट का निर्णय और निर्देश
हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देशों के पालन की शर्त पर श्री समाधिया के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी:
- नोटरी का काम फिर से शुरू करने से पहले श्री समाधिया को एक बोर्ड लगाना होगा जिस पर लिखा हो कि विवाह के निष्पादन से संबंधित किसी भी दस्तावेज का नोटरीकरण नहीं किया जाएगा।
- श्री समाधिया को नोटरी कार्य शुरू करने से पहले (अंतिम तिथि 17 अगस्त 2026 तक) हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में 2,00,000 रुपये की राशि जमा करनी होगी। यह राशि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, ग्वालियर द्वारा बार एसोसिएशन में सेवाओं के सुधार के लिए उपयोग की जाएगी।
- यह भी स्पष्ट किया गया कि लागत जमा करने से पहले दस्तावेज नोटरीकृत करने का कोई भी प्रयास आदेश की अवहेलना माना जाएगा और उन्हें नोटरी के रूप में कार्य करने से स्थायी रूप से रोक दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने दर्ज किया कि 28 जुलाई 2026 को सील किया गया उनका रजिस्टर वापस लौटा दिया गया है, जिस पर उन्होंने यह प्रविष्टि दर्ज की है कि अदालत के आदेश के तहत उनका नोटरी कार्य निलंबित रहा था।
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री जितेन्द्र शर्मा द्वारा दिए गए सुझाव की सराहना की। उन्होंने कहा था कि सभी नोटरीज को भारत सरकार के 10 अक्टूबर 2024 के कार्यालय ज्ञापन की प्रति के साथ एक पत्र भेजा जाएगा, ताकि हर नोटरी को उनके क्षेत्राधिकार की सीमाओं से अवगत कराया जा सके और कोर्ट मैरिज की उम्मीद में आने वाले निर्दोष लोगों को गुमराह होने से बचाया जा सके।
मामले का विवरण
मामले का शीर्षक: इन री. सुओ मोटू रिट पिटीशन 26269/2026 बनाम राघवेंद्र समाधिया नोटरी पब्लिक दतिया
वाद संख्या: रिट पिटीशन संख्या 28645/2026
पीठ: जस्टिस जी. एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला
निर्णय की तिथि: 12 अगस्त, 2026

